पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (PoJK) के कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्ज़ा ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) और जम्मू-कश्मीर में मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति पर प्रकाश डाला और वहां के लोगों के चल रहे संघर्ष की ओर ध्यान आकर्षित किया। अपने संदेश में मिर्ज़ा ने कहा कि इन क्षेत्रों के लोगों की आवाज़ और चिंताओं को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें न केवल विश्वसनीय और स्वतंत्र जानकारी तक पहुंच से वंचित रखा जाता है, बल्कि स्थानीय मीडिया में विविध दृष्टिकोणों से भी वंचित रखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राय पृष्ठों और संपादकीय क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक और राजनीतिक घटनाक्रमों पर सवाल उठाने वाले दृष्टिकोणों को जगह नहीं दी जाती है।
मिर्ज़ा ने आगे दावा किया कि इन क्षेत्रों में मीडिया परिदृश्य पर इस्लामाबाद स्थित संघीय निकाय, पाकिस्तान के प्रेस और सूचना विभाग (PID) का कड़ा नियंत्रण है, जो उनके अनुसार सेना के मीडिया विंग, अंतर-सेवा जनसंपर्क (ISPR) के प्रभाव में काम करता है। उनके अनुसार, इस नियंत्रण के परिणामस्वरूप ऐसी सामग्री प्रकाशित होती है जो बड़े पैमाने पर पाकिस्तान समर्थक विचारों को दर्शाती है, जबकि वैकल्पिक या असहमति वाली आवाजों को बाहर रखा जाता है।


