नीदरलैंड ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से सदियों पुरानी अनैमंगलम तांबे की प्लेटें (ताम्रपत्र) भारत को वापस सौंप दीं. यह औपनिवेशिक काल के दौरान ले जाई गई सांस्कृतिक विरासतों की वापसी में एक बड़ा कदम है. ये प्लेटें चोल काल की है. इन दुर्लभ शिलालेखों की वापसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की यात्रा के हिस्से के रूप में नीदरलैंड के दौरे के दौरान हुई.
नीदरलैंड में ‘लीडेन प्लेट्स’ के नाम से भी जाने जाने वाले ये तांबे के शिलालेख चोल राजवंश अहम अभिलेखों में से हैं. ये एक शताब्दी से अधिक समय से डच के कब्जे में थे. इसे लीडेन यूनिवर्सिटी में रखा हुआ था. यह वापसी भारत और डच सरकार के बीच सालों की राजनयिक चर्चाओं के बाद हुई है.
अनैमंगलम ताम्रपत्र क्या हैं?
ये ताम्रपत्र 985 और 1014 ईस्वी के बीच सम्राट राजराज चोल प्रथम के शासनकाल के हैं. इतिहासकार इन्हें तमिल विरासत का एक अहम हिस्सा मानते है. भारत से बाहर संरक्षित चोल काल के शिलालेखों के सबसे बेहतरीन उदाहरणों में से एक मानते हैं.
अभिलेखों में नागापट्टिनम में एक बौद्ध मठ, चूड़ामणि विहार को दिए गए भूमि राजस्व और करों के अनुदान का उल्लेख है. इस मठ को इंडोनेशिया के श्रीविजय साम्राज्य के शासक श्री मार विजयोतुंग वर्मन ने बनवाया था.


