बूँद-बूँद पानी को तरसता पाकिस्तान, प्रशासनिक लापरवाही और खराब शहरी नियोजन में खामियां

रावलपिंडी और उसके छावनी क्षेत्रों में पानी का संकट और भी गंभीर होता जा रहा है, जिससे निवासियों के अनुसार वर्षों की प्रशासनिक लापरवाही और खराब शहरी नियोजन की खामियां उजागर हो रही हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, भीषण गर्मी और पुरानी अवसंरचनाओं के ध्वस्त होने से शहर के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, भूमिगत जल भंडार में तेजी से गिरावट के कारण संकट और भी गहरा गया है। अधिकारियों ने बताया कि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर लगभग 800 फीट तक गिर गया है, जिससे दशकों पुराने कई ट्यूबवेल बेकार हो गए हैं। सरकार द्वारा स्थापित बड़ी संख्या में मोटरें, जिनमें से कई 1990 के दशक से चल रही हैं, या तो जल गई हैं या अत्यधिक दबाव के कारण काम करना बंद कर चुकी हैं।

बार-बार बिजली कटौती और अनियोजित लोड-शेयरिंग ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है। यहां तक ​​कि चालू ट्यूबवेल भी निर्बाध आपूर्ति प्रदान करने में असमर्थ हैं, जिससे हजारों घरों को प्रतिदिन लंबे समय तक पानी नहीं मिल पा रहा है। निवासियों की शिकायत है कि पिछले वर्षों में बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने गर्मी के मौसम में पानी की मांग में होने वाली अनुमानित वृद्धि के लिए तैयारी नहीं की।

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