रायपुर, 15 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव, गरीब और किसान को सशक्त बनाने के विजन के अनुरूप प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के किसानों के लिए आय का नया जरिया बन रही है। धान की पारंपरिक खेती के साथ जिले के करीब 150 किसान अब मछली पालन, हैचरी और पाउंड लाइनर जैसी आधुनिक गतिविधियों से अपनी आजीविका मजबूत कर रहे हैं। सरकारी अनुदान और बुनियादी सुविधाओं के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
बिरकोनी के दिनेश चंद्राकर बने मिसाल
बिरकोनी निवासी दिनेश चंद्राकर ने पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए मछली पालन की ओर रुख किया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्होंने करीब 7.50 लाख रुपये की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब का निर्माण कराया। इसके अलावा करीब 14 लाख रुपये की लागत से 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में मछली हैचरी स्थापित की।
हैचरी में तैयार मछली के बच्चों को तालाब में डालकर 8 से 9 महीने में करीब 15 टन मछली का उत्पादन किया जा रहा है। उत्पादन लागत करीब 70 से 80 रुपये प्रति किलो आती है, जबकि बाजार में मछली 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिकने से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।
हिमांशु चंद्राकर को पाउंड लाइनर यूनिट से लाभ
ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 28 लाख रुपये की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। उन्हें सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिला। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपये की शुद्ध बचत हो रही है।
गांव में ही मिल रहा रोजगार
मछली पालन से किसानों के साथ स्थानीय मजदूरों को भी रोजगार मिल रहा है। बिरकोनी के मजदूरों के अनुसार, अब उन्हें रोजगार की तलाश में बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही सालभर नियमित काम मिल रहा है। करीब 9 हजार रुपये प्रतिमाह की आय से उनके परिवारों के जीवनयापन में भी सहूलियत हुई है।
इन गतिविधियों को मिल रहा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत नए तालाबों के निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, मछली बीज हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों के लिए सहायता दी जा रही है। योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।
महासमुंद जिले में धान की पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का नया माध्यम बनकर उभर रहा है।


