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Sunday, February 8, 2026
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हावड़ा ब्रिज के इतिहास का रोमांचक रहस्य

हावड़ा ब्रिज भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के कोलकाता में हुगली नदी पर स्थित एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित पुल है। इसे रवींद्र सेतु भी कहा जाता है। यह पुल न केवल कोलकाता का प्रतीक है, बल्कि इंजीनियरिंग और वास्तुकला का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

निर्माण और इतिहास

  • निर्माण वर्ष: 1943 में इसे चालू किया गया।
  • डिजाइन: हावड़ा ब्रिज एक कैंटिलीवर पुल है। इसका निर्माण बिना नट और बोल्ट के किया गया है।
  • निर्माता: ब्रैथवेट, बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी।
  • लंबाई: 705 मीटर (2313 फीट)।
  • चौड़ाई: 71 फीट।

प्रमुख विशेषताएँ

  1. सामग्री: इस पुल का निर्माण स्टील से किया गया है, विशेष रूप से टाटा स्टील द्वारा निर्मित हाई टेंसाइल स्टील का उपयोग हुआ।
  2. यातायात: यह दुनिया के सबसे व्यस्त पुलों में से एक है। रोज़ाना लगभग 1,00,000 वाहन और 1,50,000 से अधिक पैदल यात्री इसे पार करते हैं।
  3. संदर्भ: यह हावड़ा और कोलकाता शहर को जोड़ता है।

महत्व

  1. पर्यटन: हावड़ा ब्रिज कोलकाता आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यह हुगली नदी पर सूर्यास्त के समय एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।
  2. सांस्कृतिक महत्व: हावड़ा ब्रिज बंगाल की सांस्कृतिक पहचान है और कई फिल्मों, गानों और साहित्य में इसका उल्लेख है।
  3. आर्थिक योगदान: यह कोलकाता के व्यापार और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रोचक तथ्य

  • हावड़ा ब्रिज का आधिकारिक नाम रवींद्र सेतु है, जो कवि रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर रखा गया है।
  • पुल की संरचना में लगभग 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है।
  • यह 150 मीटर तक फैला हुआ सबसे लंबा कैंटिलीवर ब्रिज है।

कैसे पहुँचे

हावड़ा ब्रिज तक पहुँचने के लिए कोलकाता शहर के किसी भी हिस्से से टैक्सी, बस या लोकल ट्रेन का उपयोग किया जा सकता है। हावड़ा स्टेशन इस पुल के निकटतम रेलवे स्टेशन है।

यह पुल न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार है, बल्कि यह बंगाल के गौरव और भारतीय संस्कृति का प्रतीक भी है।

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