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Friday, March 13, 2026
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रहस्यमय द्वारका नगरी का इतिहास जानिए

द्वारका एक प्राचीन और पौराणिक नगर है जो भारतीय महाकाव्य महाभारत में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे भगवान श्री कृष्ण का निवास स्थान माना जाता है, और यह गुजरात राज्य के पश्चिमी तट पर स्थित है। द्वारका का इतिहास बहुत ही समृद्ध और रहस्यमय है। यहां के इतिहास से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें:

महाभारत और भगवान श्री कृष्ण:

  • द्वारका नगरी का संबंध महाभारत से है, जहां भगवान श्री कृष्ण ने अपनी वास स्थापित की थी। द्वारका को भगवान श्री कृष्ण ने ‘इन्द्रप्रस्थ’ के बाद अपने नए राज्य के रूप में बसाया था।
  • महाभारत के अनुसार, जब श्री कृष्ण ने अपनी युवावस्था में मथुरा को छोड़ दिया था, तब उन्होंने द्वारका में अपना राज्य स्थापित किया था। यह नगरी समुद्र के किनारे बसी हुई थी और यहां का शासक श्री कृष्ण था।

    द्वारका का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व:

    • द्वारका को ‘पञ्च तीर्थ’ में से एक माना जाता है। यह तीर्थ स्थल हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान है।
    • द्वारका को “भगवान श्री कृष्ण का स्वर्गीय निवास” भी कहा जाता है। इसे ‘द्वारका की नगरी’ और ‘श्री कृष्ण की द्वारपाल’ के नाम से जाना जाता है।

    वास्तुकला और संरचनाएं:

    • द्वारका नगरी की वास्तुकला अद्वितीय थी, और यहां की इमारतें तथा मंदिर उत्कृष्ट शिल्पकला का उदाहरण थे। द्वारका के प्रसिद्ध मंदिरों में श्री कृष्ण का मंदिर प्रमुख था।
    • पुराणों के अनुसार, द्वारका की दीवारें और भवन समुद्र से घिरे हुए थे और यहां से समुद्र के किनारे तक यात्रा की जा सकती थी।

    समुद्र में डूबने की कथा:

    • द्वारका के समृद्ध और सशक्त राज्य का अंत एक महाकाय प्राकृतिक आपदा के कारण हुआ। महाभारत के बाद, जब श्री कृष्ण का देहांत हुआ, तो द्वारका नगरी समुद्र में समाहित हो गई। यह घटना आज भी द्वारका के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और रहस्यमय मोड़ है।
    • कई मान्यताओं के अनुसार, द्वारका नगरी समुद्र में डूब गई और आज भी इसके अवशेष समुद्र के नीचे पड़े हुए हैं। समुद्र के किनारे के कुछ स्थल इस परिलक्षित सिद्धांत को समर्थन देते हैं।
    • आधुनिक द्वारका:
    • आजकल, द्वारका का स्थान गुजरात राज्य में स्थित है, जो एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यहां हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं।
    • द्वारका में श्री कृष्ण के मंदिर के साथ-साथ कई अन्य धार्मिक स्थल और ऐतिहासिक संरचनाएं भी स्थित हैं।

      निष्कर्ष: द्वारका नगरी का इतिहास न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। यह शहर भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा हुआ है और इसकी गहरी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर आज भी लोगों के बीच जीवित है।

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