बेहतरीन बनाई गई नई शिक्षा नीति में अध्यापन कार्य कितना व्यवहारिक होगा ?
इस शिक्षा नीति मे शिक्षण प्रशिक्षण के लिए नियुक्त लोक सेवकों की नई भूमिका क्या होगी ?
क्या अध्यापन कार्य के लिए नियुक्त लोक सेवक के कार्यों की कड़ी व निष्पक्ष समीक्षा होगी ?
पूरब टाइम्स, रायपुर. केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति में कई ऐसे परिवर्तन किये गये जोकि बरसों से शिक्षण में होते हुए भी छात्र के आगामी जीवन में अनुपयोगी थे परंतु सरकारी व अर्ध सरकारी शालाओं के शिक्षकों की भारी भरकम फौज को, नई शिक्षा नीति के हिसाब से व ऑन लाइन प्रशिक्षण देने के लिये, तैयार करने का काम सरकार के लिये एक बहुत ही कठिन कार्य हो रहा है . इसका कारण यह है कि कुछ शिक्षक, बरसों से एक ही ढर्रे में पढ़ाते हैं , चाहे सिलेबस में किसी भी प्रकार का परिवर्तन हो, तो कुछ शिक्षक, केवल शिक्षा विभाग में नौकरी करते दिखते हैं परंतु उनका अधिकांश समय अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में होता है, इसके अलावा उनका एक बड़ा वर्ग राजनेता, राजनीति में सलाहकार का हो जाता है. केवल कुछ शिक्षक ही अपने व विद्यार्थियों के ऊपर मेहनत करते हैं . ऑन लाइन व ट्रेड प्रशिक्षण में जहां पालकों, विद्यार्थियों की मानसिक दशा को बदलने में मेहनत लगेगी, वहीं शिक्षकों को उस स्तर पर पहुंचा पाना भी एक चुनौती होगा . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट…
क्या है नई शिक्षा नीति
नई शिक्षा नीति 2025 (NEP2025) का मतलब 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विस्तार है, जिसका लक्ष्य भारत की शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, कौशल-उन्मुख और समग्र बनाना है, जिसमें व्यावसायिक प्रशिक्षण, AI-आधारित शिक्षा, 5+3+3+4 संरचना और रटने की बजाय गम्भीर विश्लेषक सोच पर जोर दिया जाता है, ताकि छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके और 2030 तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
क्या है नई शिक्षा नीति उद्देश्य:
• शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाना।
• भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना।
• शिक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण करना।
मुख्य विशेषताएँ और बदलाव
• कौशल विकास: इस वर्ष तक 50% छात्रों को कोडिंग, वित्तीय साक्षरता जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोडऩा है, ताकि वे नौकरी के लिए तैयार हो सकें।
• संरचना (5+3+3+4): 3 से 18 साल के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा पर जोर, पारंपरिक 10+2 प्रणाली को बदलना।
• लचीले पाठ्यक्रम: कला, विज्ञान और व्यावसायिक कौशल का मिश्रण, जिससे छात्र विविध करियर के लिए तैयार हों।
• रटने की बजाय समझ: रचनात्मकता, गम्भीर विश्लेषक और समस्या-समाधान पर फोकस, जिससे छात्रों की सोचने की क्षमता बढ़े।
• AI और डिजिटल शिक्षा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यक्तिगत शिक्षण (GERरु) को शामिल करना।
• अर्धवार्षिक बोर्ड परीक्षाएँ: परीक्षाओं के तरीके में बदलाव।
• सकल नामांकन अनुपात (GER): 2030 तक उच्च शिक्षा में 100% GER का लक्ष्य।
• कक्षा 5 और 8 में परीक्षा: कक्षा 8 तक स्वत: पदोन्नति की नीति समाप्त, अब इन कक्षाओं में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
क्या नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन तंत्र में शासकीय शालाओं में अध्यापन कार्य हेतु नियुक्ति शिक्षक पूर्ववत “मजे मार पाएंगे” ?
वैसे तो नई शिक्षा नीति से सभी आशान्वित है लेकिन इन नवजात आशाओं को सिर्फ एक शंका पुन: पूर्ण विराम लगाने का कार्य कर रही है . वह यह है कि शासन जिन लोक सेवको को अध्यापन कार्य के लिए नियुक्त करती है, ट्रेनिंग देती है , क्या ऐसे तथाकथित गुरुजी इस नई शिक्षा नीति में भी अपने पद नियुक्ति के बाद किसी अन्य शासकीय विभागों में सेवाएं देने के लिए प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर पाएंगे ? यह प्रश्न नई शिक्षा नीति के विषय में इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि वर्तमान परिस्थिति यह है कि जिन लोगों को शासन अध्यापन कार्य के लिए बाकायदा नियुक्ति दी गई , ऐसे लोग नियुक्ति उपरांत प्रतिनियुक्ति पर किसी अन्य शासकीय विभाग और नेता मंत्री के यहां अपनी सेवाएं देने के लिए स्वयं को समर्पित कर देते थे तथा अपने मूल विभाग अर्थात शिक्षा विभाग को अपूरणीय क्षति पहुंचाते थे. यह भी मुख्य कारण है कि विगत बीस वर्षों में अनेक शासकीय स्कूल गर्त में चले गए और अशासकीय स्कूलों ने शिक्षा को व्यवसाय का स्वरूप देकर एक विक्षिप्त स्थित में पहुंचा दिया .


