राजधानी रायपुर में आज दिव्यांगजनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने का प्रयास किया। लेकिन इस दौरान पुलिस और प्रशासन द्वारा उनके साथ किया गया व्यवहार सवालों के घेरे में आ गया है।
मांगें और आंदोलन
दिव्यांगजनों की मुख्य मांगें थीं:
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण लागू करना
- पेंशन राशि में वृद्धि
- सभी जिलों में दिव्यांग सेवा केंद्र की स्थापना
- सरकारी भवनों और वाहनों में दिव्यांगों के लिए सुविधाएं अनिवार्य करना
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
👮 पुलिस का रवैया विवादों में
जैसे ही दिव्यांगजनों का जत्था विधानसभा की ओर बढ़ा, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, कई व्हीलचेयर पर बैठे दिव्यांग नीचे गिर पड़े। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठी दिखाकर डराने की कोशिश की और दुर्व्यवहार किया।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा –
“हम शांति से अपनी बात कहने आए थे, हमें धकेला गया, कुछ साथियों को चोट भी आई है। क्या हमारे अधिकार की मांग करना अपराध है?”
🏛️ विपक्ष ने उठाए सवाल
घटना के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा –
“दिव्यांगजनों के साथ इस तरह का बर्ताव शर्मनाक है। सरकार को माफ़ी मांगनी चाहिए और तत्काल उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए।”
🗣️ प्रशासन का पक्ष
प्रशासन ने बयान में कहा कि धारा 144 लागू होने के कारण भीड़ को रोका गया। यदि कोई अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
📌 निष्कर्ष
जहां एक ओर दिव्यांगजन अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं, वहीं पुलिस द्वारा उनके साथ की गई सख्ती ने जनमानस में रोष पैदा किया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है।


