दिल्ली। दिल्ली सरकार ने अचल संपत्तियों के पंजीकरण में राजस्व की चोरी रोकने, भू-माफिया और धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के माध्यम से होने वाले संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच और स्क्रूटनी के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी सब-रजिस्ट्रार को आदेश जारी किए गए हैं कि वे इन निर्देशों का तत्काल प्रभाव से कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बुधवार को एक बयान में कहा कि सरकार दिल्ली के लोगों के हितों की रक्षा और सरकारी राजस्व को सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कई मामलों में दस्तावेजों को केवल ‘जीपीए’ का नाम देकर नाममात्र की स्टांप ड्यूटी पर पंजीकृत करा लिया जाता है, जबकि उनके भीतर संपत्ति की बिक्री, कब्जा सौंपने और मालिकाना हक ट्रांसफर करने जैसे प्रावधान भी शामिल होते हैं। यह सीधे तौर पर स्टांप ड्यूटी की चोरी है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब दिल्ली के सभी सब-रजिस्ट्रार पंजीकरण के लिए आने वाले प्रत्येक जीपीए दस्तावेज की बारीकी से जांच करेंगे। जांच में विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि कहीं दस्तावेज में किसी प्रकार के पैसे के लेन-देन का उल्लेख तो नहीं है, संपत्ति का कब्जा सौंपने की बात तो नहीं लिखी गई है, जीपीए अपरिवर्तनीय तो नहीं है अथवा उसमें संपत्ति को बेचने, उपहार देने, ट्रांसफर करने या बंधक रखने का स्थायी अधिकार तो नहीं दिया गया है।


