क्या चीन और अमेरिका भारत ने बिगाड़ दिया पूरा खेल?

ग्लोबल लेवल पर चीन और अमेरिका में सुपरपावर बनने की होड़ मची हुई है. कुछ एक्सपट्र्स का कहना है कि बीजिंग साल 2030 तक वॉशिंगटन को पछाड़ कर दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन जाएगा. अब आर्थिक और सामरिक मामलों के विशेषज्ञों की राय चीन को लेकर बदलने लगे हैं.

चीन की आर्थिक प्रगति की रफ्तार और डिफेंस सेक्टर में बढ़ते रुतबे को लेकर नया विश्लेषण सामने आया है. अब एक्सपर्ट बता रहे हैं कि चीन को अमेरिका के लेवल तक पहुंचकर उसे पीछे छोडऩे में अभी कम से कम तीन दशक का समय लगेगा. ढ्ढरूस्न और वलर््ड बैंक के इकोनोमिक आउटलुक फोरकास्ट से भी इसको लेकर कुछ संकेत मिलते हैं. दूसरी तरफ, तमाम बाधाओं के बावजूद भारत का त्रष्ठक्क ग्रोथ वित्त वर्ष 2026-27 में चीन से ज्यादा रहने का अनुमान है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से अमेरिका को डिक्लाइनिंग पावर और ढलती हुई महाशक्ति बताते रहे हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में भी उन्होंने अमेरिका को डिक्लाइनिंग पावर कहा था.

हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था, सैन्य क्षमता, तकनीकी बढ़त, मुद्रा प्रभाव, कूटनीतिक गठबंधनों और सॉफ्ट पावर से जुड़े आंकड़े इस दावे की अलग तस्वीर पेश करते हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका न केवल अभी भी दुनिया की सबसे प्रभावशाली शक्ति बना हुआ है, बल्कि आने वाले कई दशकों तक उसकी वैश्विक प्रधानता को चुनौती देना चीन के लिए आसान नहीं होगा.
अमेरिका की बढ़त कायम

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