इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बाल विवाह के संबंध में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में बाल विवाहों में हो रही वृद्धि को देखते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को ऐसे विवाह संपन्न कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और डॉ. अजय कुमार-द्वितीय की पीठ ने 14 वर्षीय लड़की के कथित अपहरण और बाल विवाह के संबंध में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार करते हुए ये निर्देश पारित किए।

न्यायालय ने 13 मई को अपने आदेश में कहा चूंकि बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे अवैध बाल विवाहों को संपन्न कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश राज्य में बाल विवाह दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।

अदालत ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है जिसे देश से जड़ से खत्म किया जाना चाहिए, जो कि केवल एक वैधानिक लक्ष्य नहीं बल्कि एक संवैधानिक आवश्यकता है।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है और इसे देश से जड़ से खत्म करना आवश्यक है। बाल विवाह का उन्मूलन केवल एक वैधानिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अनिवार्यता है।

अदालत ने राज्य के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे सभी पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस प्रमुखों को निर्देश और दिशानिर्देश जारी करें ताकि जांच के दौरान या किसी अन्य तरीके से बाल विवाह का पता चलने पर बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत तुरंत कार्यवाही शुरू की जा सके।

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