भारत से दूरियां बढ़ाता नेपाल 4 महीने बाद दुनिया की आर्थिक व्यवस्था से काट दिया जाएगा

वो देश जो कभी भारत की दोस्ती पर गर्व करता था। वो देश जिसने पिछले कुछ समय में अपनी सीमाओं को लेकर भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की। आज वही नेपाल एक ऐसे दलदल में फंस चुका है जहां से निकलना उसके लिए लगभग नामुमकिन सा लग रहा है।

दरअसल मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने वाली दुनिया की सबसे बड़ी संस्था एफएटीएफ ने नेपाल को वह अल्टीमेटम दे दिया है जिससे काठमांडू से लेकर दिल्ली तक खलबली मच चुकी है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक पुरानी कहावत है। दुश्मन सोच समझकर चुनिए, लेकिन दोस्त कभी मत खोइए। नेपाल ने शायद यही गलती कर दी। एक तरफ नेपाल अपनी आंतरिक राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव में फंसकर भारत से दूरियां बढ़ाता रहा और दूसरी तरफ उसके घर के भीतर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का काला खेल चलता रहा।

अब खबर यह है कि एफएटीएफ यानी कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की क्षेत्रीय शाखा एपीजी ने नेपाल को आखिरी चेतावनी दी। नेपाल के पास सिर्फ 4 महीने का वक्त है वरना वह दुनिया की आर्थिक व्यवस्था से काट दिया जाएगा।

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