केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि ‘इंडी’ गठबंधन के सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु का उपयोग करके महिला आरक्षण का विरोध किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि विपक्ष विधेयक के क्रियान्वयन के तरीके का नहीं, महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं वे एससी-एसटी सीटों में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन तीन बिलों का उद्देश्य है…
पहला: महिला सशक्तिकरण करने वाले संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू कर 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए।
दूसरा: एक व्यक्ति — एक वोट — एक मूल्य… यह सिद्धांत जो हमारे संविधान के मूल में है, जिसे संविधान सभा ने तय किया था, उस संविधान की स्पिरिट को लागू किया जाए।
शाह ने कहा कि कई सारे सदस्यों ने अनेक प्रकार की आशंकाएं व्यक्त कीं कि परिसीमन अभी क्यों लाया जाए? तो मैं बता दूं कि जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया है, उसमें जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
अब ये कहते हैं कि बिल लाते समय ऐसा जिक्र क्यों किया गया? यह हमने नहीं किया। 1971 में इंदिरा जी की सरकार थी, तब वह ऐसा निर्धारित करके गई थीं, जिसके कारण हमें इसका जिक्र करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है। परिसीमन से ही SC और ST जिसकी संख्या बढ़ती है, उसकी सीटें बढ़ने का भी प्रावधान है। एक प्रकार से जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वह SC और ST सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं।


