परमाणु विज्ञान भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास असीमित ऊर्जा है

6 अप्रैल, 2026 भारत के वैज्ञानिक इतिहास में एक स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाने वाला दिन बन गया है। दशकों की मेहनत और इंजीनियरिंग चुनौतियों को पार करते हुए, कल्पक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने ‘क्रिटिकैलिटी’ (Criticality) हासिल कर ली है। यह उपलब्धि केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है,

बल्कि यह भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास भविष्य की असीमित ऊर्जा की चाबी है। एक भारी परमाणु के दो या उससे छोटे परमाणुओं में टूटने और उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकलने की प्रक्रिया को न्यूक्लियर फिशन कहते हैं। कल्पक्कम में मौजूद प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल, 2026 को ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली, और भारत का लंबे समय से देखा जा रहा न्यूक्लियर सपना हकीकत बनने की दिशा में एक निर्णायक कदम और आगे बढ़ गया।

क्रिटिकैलिटी न्यूक्लियर रिएक्टर की वह सटीक स्थिति होती है, जब उसमें होने वाली चेन रिएक्शन (श्रृंखला अभिक्रिया) अपने-आप चलने लगती है। इसका मतलब है कि फिशन की हर घटना से ठीक उतने ही न्यूट्रॉन निकलते हैं, जो एक स्थिर गति से अगली फिशन घटना को शुरू कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे भारत की न्यूक्लियर यात्रा का एक “निर्णायक कदम” बताया, और साथ ही देश के विशाल थोरियम भंडारों का इस्तेमाल करने की दिशा में भी एक अहम कदम करार दिया। लेकिन भारत ने असल में क्या हासिल किया है, और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

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