नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं को राहत इसलिए मिली, क्योंकि जज ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया. कोर्ट के अनुसार इस मामले मे वैध एफआईआर ही मौजूद नहीं है. क्या ईडी के अधिकारियों को कानून की इतनी बुनियादी जानकारी भी नहीं है? या जब मामला विपक्षी नेताओं से संबंधित हो, तो वे नियम- कानून की कोई परवाह नहीं करते? मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से भी लंबी पूछताछ हुई. मगर अब सामने आया है कि यह सब उस मामले में हुआ, जिसमें एफआईआर ही वैध नहीं थी. लेकिन क्या इससे मनी लॉन्ड्रिंग के इल्जाम पूरी तरह खत्म हो जाएंगे ? संभवतः नहीं . पर कानूनी प्रक्रिया के कारण अभी तो संभावना यही है कि ऊपरी अदालत में अपील की आड़ में सारा मामला पृष्ठभूमि में चला जाए . आपकी क्या राय है ?
इंजी. मधुर चितलंग्या, संपादक, दैनिक पूरब टाइम्स


