क्या कांग्रेसी महापौर कर रहें है “घृणित प्रशासकीय अपराध”?

पूरब टाइम्स, भिलाई. नगर निगम भिलाई व रिसाली में, श्रम क़ानूनो के प्रावधानों के अनुसार, सफाई कर्मियों के रिकॉर्ड को पारदर्शी रखकर, उनको मिल सकने वाली सुविधा मुहैया कराई जा रही हैं और ना ही शहर को साफ रखा जा रहा है. ऐसा लगता है कि सफाई का काम ठेकेदार को देकर निगम के महापौर चैन की बंसी बजा रहे हैं. जब सफाई में होने वाले खर्च, कामगारों की संख्या, रोज की हाजरी, उनके भुगतान व दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में श्रम आयुक्त के द्वारा क़ानूनी कार्यवाही के पूर्व, नगर निगम के आयुक्त को अपना पक्ष रखने कहा गया तो पेशी में जाना तो दूर, 3 मौके दिए जाने के बावजूद कागज़ात भी जमा नहीं करा पाए हैं. ऐसा लगता है कि सफाई ठेकेदार की गड़बड़ियों को राजनीतिक संरक्षण, आपसी लेन-देन या कोताही या किसी अन्य कारण से छिपाया जा रहा है. निगम के ठेकेदार पर एमआईसी सदस्य के माध्यम से महापौर का भी नियंत्रण रहता है. अब सफाई श्रमिकों के मामले में सुस्ती के प्रशासनिक अपराध पर श्रम विभाग के एक्शन पर लोगों की निगाहें गड़ी हुई हैं. पूरब टाइम्स की रिपोर्ट..

रिसाली और भिलाई निगम क्षेत्र के मतदाताओं ने अपने पार्षदों के माध्यम से महापौर का चयन इसलिए किया था ताकि वे निगम क्षेत्र की आधार भूत व्यवस्थाओं के साथ – साथ सफाई व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखे लेकिन भिलाई और रिसाली के महापौर महोदयगण सफाई ठेकेदारों के समक्ष नतमस्तक होकर कार्य कर रहें है । ऐसा आरोप लगाए जाने का विधिक आधार यह है कि, महापौरगण ने सफाई ठेके के टेंडर अनुबंध शर्तों का विवरण, अनुबंध अभिलेख की प्रति और प्रतिदिन अनुबंध अनुसार की जाने वाली सफाई का हिसाब किताब निगम वेबसाईट पर प्रकाशित करने की पदेन जिम्मेदारी पूरी नहीं करके सफाई शुल्क और सफाई कर अदा करने वाले मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया है और संफाई कर्मियों को मस्टर रोल सह मजदूरी रजिस्टर की प्रति को श्रम विधि के निर्देशानुसार उपलब्ध नहीं करवाकर सफाई कर्मियों के आर्थिक हित पर अपने प्रशासकीय शक्तियों का दुरुपयोग कर अतिक्रमण करने का घृणित प्रशासकीय अपराध कारीत किया है।

भिलाई और रिसाली निगम के नेता प्रतिपक्ष सफाई कर्मियों को नियोजित स्थिति अनुसार उनका अधिकार दिलवाने में भले ही कोई रुचि नहीं रखते हो लेकिन भिलाई और रिसाली निगम क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति उनका निर्वाचित जनप्रतनिधि कर्तव्य विधि निर्देशित है, जिसे पूरा नहीं करके व्यवहारिक नेता प्रतिपक्ष प्रशासकीय कटघरे में खड़े नजर आ रहे है वहीं दूसरी ओर सफाई कर्मियों के श्रमिक अधिकार संरक्षण में विफल होने के कारण नेता प्रतिपक्ष अपने अमानवीय व्यवहार का प्रदर्शन कर रहे है इसलिए मतदाताओं की अदालत में भी भिलाई और रिसाली निगम के नेता प्रतिपक्ष आरोपी लोकसेवक की भूमिका में नज़र आ रहें है ।

सफाई कर्मियों के अधिकार को सुनिश्चित करवाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए सचिव श्रम विभाग और श्रम आयुक्त छत्तीसगढ़ ने संज्ञान लेकर निर्णायक कार्यवाही की और इस कार्यवाही को विधिवत् कार्यान्वित करने के लिए सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग को निर्देशित किया इसी निर्देशानुसार कार्यवाही में निगम आयुक्त रिसाली और भिलाई को नोटिस दी गई है । इस नोटिस पर दोनों आयुक्तों ने पहले तो अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई है लेकिन जब उन्हें जब इस बात का अहसास हुआ कि उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही हो सकती है तो दोनों निगम आयुक्त ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को प्राधिकृत कर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है।

सहायक श्रम आयुक्त दुर्ग कार्यालय ने रिसाली और भिलाई निगम सफाई कर्मियों को नियोजित करने वाले ठेकदारों द्वारा निगम ठेका अनुबंध शर्तों अनुसार निर्धारित प्रारूप में मस्टर रोल सह मजदूरी रजिस्टर रखकर सफाई कर्मियों को वास्तविक रोजी मजदूरी का भुगतान किया जाता है क्या ? इसकी विवेचना प्रारंभ कर दी है शिकायतकर्ता के तौर पर इस विवेचना में मैं अपना पक्ष रख रहा हूं।
अमोल मालूसरे

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