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Friday, March 13, 2026
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प्रमाणित बीज उत्पादन एक लाभकारी व्यवसाय: पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अगस्त

महासमुंद। छत्तीसगढ़ शासन का एक उपक्रम छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम द्वारा प्रत्येक वर्ष खरीफ मौसम में कृषकों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर प्रदान कर अन्य किसानों की तुलना में प्रति एकड़ अधिक लाभ कमाने का मौका देता आ रहा है लेकिन इसकी जानकारी कुछ ही किसानों को होती है। प्रमाणित बीज के उपयोग से पुराने बीज की तुलना में 10 से 15% अधिक उपज प्राप्त होता है। फ़सल की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि विभाग द्वारा प्रमाणित बीज के उपयोग को

बढ़ावा दिया जाता है। प्रदेश के किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार किस्मों का प्रमाणित बीज मुहैया कराने के लिए बीज निगम बीज उत्पादन कार्यक्रम आयोजित करता है। जिन किसानों के पास 2.5 एकड़ या इससे अधिक ज़मीन है वो छत्तीसगढ़ राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था में मामूली शुल्क देकर अपना पंजीयन करा सकते है। इसके लिए आपको अपने जिले के बीज प्रकिया केंद्र में संपर्क करना होगा। बीज उत्पादन कैसे किया जाता है इसकी पूरी जानकारी बीज प्रमाणीकरण अधिकारियों द्वारा दी जाती है।

फ़सल कटने पर अपना बीज प्रक्रिया केंद्र में देने पर आपको एक सप्ताह में बीज की अग्रिम राशि दे दी जाती है जो कुल बीज की कीमत का लगभग 60% राशि है शेष 40% राशि बीज परीक्षण परिणाम आने पर दे दी जाती है। इस प्रक्रिया में लगभग 2 माह लगते है। पिछले खरीफ में धान मोटा किस्म की किसानों बीज खरीदी दर 3043 एवं 800(बोनस) कुल 3843 रुपये प्रति क्विंटल, धान पतला किस्म- 3211 एवं 800(बोनस) कुल 4011 रुपये प्रति क्विंटल, सुगंधित किस्म- 3644 एवं 800(बोनस) कुल 4444 रुपये प्रति क्विंटल थी। इस प्रकार, पिछले

खरीफ में जिन किसानों ने बीज निगम में उत्पादन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था उन्हें शासन द्वारा निर्धारित धान की खरीदी दर 3100 रुपए प्रति क्विंटल की तुलना में मोटे किस्म की 743 रुपए प्रति क्विंटल अर्थात 15603 रुपए प्रति एकड़ अधिक मिले मतलब 1 हेक्टर वाले किसान को लगभग 40,000 रुप अधिक मिले. हालांकि किसानों को बीज का 40% राशि मिलने में 2-2.5 माह लगता है किन्तु तब भी किसी अन्य निवेश से अधिक लाभ प्राप्त होने से किसान इस कार्यक्रम के प्रति उत्साहित रहते हैं। अभी शासन स्तर पर उत्पादन अनुदान बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है जिसे अंतिम रूप मिलने पर लाभ और अधिक होगा। इसके लिए किसानों को 31 अगस्त तक पंजीयन कराना होगा।

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