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Tuesday, March 17, 2026
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पापमोचनी एकादशी 2025: तिथि, महत्व और व्रत विधि

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने दो बार आने वाली एकादशी को भगवान विष्णु का प्रिय व्रत माना जाता है। सालभर में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं, और इनका पालन करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इन्हीं में से एक है पापमोचनी एकादशी, जो चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

पापमोचनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

🔹 एकादशी तिथि प्रारंभ: 25 मार्च 2025, सुबह 5:05 AM
🔹 एकादशी तिथि समाप्त: 26 मार्च 2025, सुबह 3:45 AM
🔹 व्रत तिथि: 25 मार्च 2025 (उदया तिथि के अनुसार)

व्रत और पूजन विधि

स्नान और संकल्प – सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा – धूप, दीप, फल, फूल और तुलसी पत्र अर्पित करें।
विष्णु सहस्त्रनाम या भगवद गीता का पाठ करें
भोजन नियम – इस दिन अनाज और नमक का सेवन नहीं किया जाता। केवल फलाहार करें।
रात्रि जागरण – संभव हो तो रात्रि में भगवान विष्णु के भजन और कीर्तन करें।
पारण समय – द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें।

पापमोचनी एकादशी का महत्व

🔹 यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
🔹 इसे करने से पिछले जन्म के दोष और कर्म बंधनों से छुटकारा मिलता है।
🔹 भगवान विष्णु की कृपा से सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

इसलिए श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पापमोचनी एकादशी का व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

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