मौसम में अचानक बदलाव इसकी प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। गर्मियों में पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर त्वचा के रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्यों होती हैं ये समस्याएं?
पसीना और बंद पोर्स बनते हैं घमौरियों की वजह
डॉक्टरों के अनुसार, गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकलता है। जब यह पसीना डेड स्किन और गंदगी के कारण बाहर नहीं निकल पाता, तो त्वचा के नीचे जमा होकर घमौरियों का रूप ले लेता है। इससे खुजली, जलन और छोटे लाल दाने होने लगते हैं।
तेज धूप से होता है सनबर्न
गर्मियों में सूरज की अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें बेहद खतरनाक होती हैं। बिना सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा की ऊपरी परत झुलस जाती है, जिसे सनबर्न कहा जाता है। इससे त्वचा काली पड़ने लगती है और समय से पहले झुर्रियां आने का खतरा बढ़ जाता है।
उमस में तेजी से फैलता है फंगल इंफेक्शन
उमस भरे मौसम में शरीर के वे हिस्से जहां पसीना ज्यादा आता है। जैसे बगल, गर्दन और जांघों के बीच वहां नमी बनी रहती है। यही नमी फंगस को बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल देती है, जिससे खुजली, लाल चकत्ते और जलन जैसी समस्याएं होती हैं।
डिहाइड्रेशन से स्किन हो जाती है बेजान
गर्मियों में अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इससे त्वचा अपनी नमी खो देती है और रूखी व बेजान दिखने लगती है।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
गर्मियों में स्किन को सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी आदतें अपनानी चाहिए।
दिन में कम से कम दो बार नहाकर त्वचा को साफ रखें
हमेशा ढीले और सूती कपड़े पहनें
धूप में निकलने से 15–20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं
पसीने वाले हिस्सों को साफ और सूखा रखें
फंगल इंफेक्शन से बचने के लिए एंटी-फंगल पाउडर का इस्तेमाल करें।
रोजाना 3–4 लीटर पानी पिएं।
नारियल पानी, खीरा, तरबूज और नींबू पानी को डाइट में शामिल करें।


