Episode – 35
समय गुज़रते जा रहा था और सचमुच शाम होने लगी थी . अब हम दो प्रेमियों की आखरी
मुलाक़ात का आखरी लम्हा आ रहा था . फिर मोहब्बत के इन ज़ज़्बातों को हमेशा के लिये
खामोश होना था . एक दूसरे के प्रेम में डूबे , हम दोनो , कल से होने वाली जुदाई की आग में
अभी से जलने लगे थे.
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
एक दूसरे के पहलू में ऐसा लग रहा था कि पूरी दुनिया सिमट आयी है. मन कर रहा था कि
वक़्त ठहर जाये . मैं चुपचाप उसकी गोद में आंखें बंद किये लेटा था और उसके दिल की
धड़कनों को महसूस कर रहा था . वह बीच बीच में मेरे सिर हाथ फिराते हुए अपना कांपता हाथ
मेरे गालों पर रख देती थी . तभी मुझे लगा कि पानी की एक बूंद गिरी . अब मैंने आंखें
खोलकर उसकी आंखों की तरफ देखा तो पाया कि वह मुस्कुरा रही है और उसकी आंखों से
लगातार आंसू बह रहे हैं. मैंने आंखों के इशारे से पूछा कि यह क्या है ? वह बोली , मैं अभी
इतनी खुश हूं कि आपको बता नहीं सकती . इस पल मुझे लग रहा है कि मेरा प्यार सार्थक हो
गया है. अब ज़िंदगी में कभी भी खालीपन लगेगा तो इस पल को याद कर लूंगी . मैं भी बोल
पड़ा
मैंने मान लिया था अपना हक़
तेरी आंखों की छलकती मय पर
साथ मांगा पर आदत बन बैठी तुम
अब कैसे जियूंगा मयनोशी के बिना
मेरी बात सुनकर तुमने मुझे अपने सीने पर ज़ोर से भींच लिया . अब हम खड़े हो गये पर हाथ
में हाथ लिये हुए थे. मैं बोला, तो अब चलें ? तुमने कहा , हां . मैने पूछा , फिर आगे ? तुमने
बताया कि दो दिन बाद ही तुम अहमदाबाद जाने वाली है , आगे पढ़ने के लिए और तुम यह
नहीं चाहती कि तुम्हारे लिए मेरी पढ़ाई में भी कोई फ़र्क़ आये . इंजीनियरिंग कम्प्लीट करने में
मेरे दो साल बाकी थे और तुम्हारा कोर्स तीन साल का था . तुम्हारी आंखों में आंसू थे. मैंने कहा
, इतना उदास होने की ज़रुरत नहीं है. वक़्त फुर्र से उड़ जाता है. तीन साल यूं ही गुज़र जाएंगे.
तुम मुस्कुराई और बोली –
कल की हसीन मुलाक़ात के लिये आज रात के लिये हम तुम जुदा हो जाते हैं.
मैं भी मुस्कुराते हुए बोला , चलो , यहीं सो जाते हैं . तुम हंस पड़ी और बोली, कल आपको मेरे
घर लंच पर आना है . मैं आपको फॉर्मल इनविटेशन दे रही हूं . मेरे परिवार से मिलने के लिये . मैं
चाहती हूं कि हम यूं ही मस्ती भरे रिश्ते में बंधें रहें . पर ना तुमसे कोई कमिटमेंट चाहती हूं और ना ही
कमिट कर सकती हूं . और मुझे अपने बहु-पाश में जकड लिया. मैंने उसके माथे को चूमा तो
वह मेरी दोनों आंखों और मेरे हाथों में चुम्बन लेते ज़ोर से रो पडी और बोली ध्रुव, आज के बाद
तुम मेरे अज़ीज़ दोस्त रहोगे . मैंने कहा , हां, मलिका, तुम भी मेरी केवल अतिप्रिय दोस्त बन
जाओगी .
वो मुझको छोड़ कर खुश हैं तो शिकायत कैसी …
अब मैं उसको खुश भी ना देखूं तो मोहब्बत कैसी ….


