Episode – 34
मैंने उससे कहा कि क्या हुआ ? अब वह खुल कर हंस पड़ी और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर उसे
हिलाते हुए बोली, मैं एक बार महसूस करना चाहती थी कि प्यार की कशिश कैसी होती है ? मैंने पूछा ,
तो कुछ महसूस किया ?
वह अब मेरी बाहों में झूलती हुई बोली , बेहद फिल्मी होते हुए बोली , आज मैं सबकुछ भूल कर, बस ,
आपके प्यार में पागल हो जाना चाहती हूं –
ऐ मेरे दिल यूं झूठा मुस्कुरा कर ,
सब कुछ छिपाने की कोशिश ना कर,
बेदर्द ,बेकदर, मान जा अब तू इश्क़ है ,
उनसे नज़रें चुराने की कोशिश ना कर.
अब मैंने भी उसे अपने से करीब खींचते हुए, फिल्मी अंदाज़ में बोला ,
चल हवा , नशीली फ़िज़ाओं में मदहोश ना हो जाऊं
तेरी बाँहों का सहारा दे दे , कहीं बेहोश ना हो जाऊं
इसके बाद , सचमुच कितनी ही देर तक हम एक दूसरे की बाहों में अपनी खामोशी और एक दूसरे के
अहसास में खो गये . हम जान गये थे कि यह आखरी मौका है , एक दूसरे से इस तरह से, आमने-
सामने , प्रेमी-प्रेमिका की तरह मिल पाने का . इसके बाद कम से कम तीन साल तो हमें, बस, दोस्त
बनकर रहना होगा . फिर धीरे से हम एक दूसरे में खोये हुए ही बैठ गये . मैंने तुम्हारी गोद में सिर रख
दिया और तुम मेरे बालों में उंगलियां फिराने लगी . एक अद्भुत अहसास था हमारे भीतर . तुमने धीरे
से कहा , सुनो . मैं आंखें बंद किये ही बोला , हूं … तुम बोली , तुम्हारे घुमावदार घुंघराले बालों में फंस
कर रह गई हूं मैं . मैंने कहा , और मैं तुम्हारी रेशमी ज़ुल्फों के साये में लेटकर दुनिया के सारे मजनुओं
को ईर्ष्या में डाल रहा हूं . तुम ज़ोर से खिलखिला उठी और बोली , ऐसी बात है . मैं फिर थोड़ा और
फिल्मी होकर बोला –
तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा
नज़र मिलाई तो पूछूंगा इश्क का अंजाम
नजर झुकाई तो खाली सलाम कर लूँगा
समय गुज़रते जा रहा था और सचमुच शाम होने लगी थी . अब हम दो प्रेमियों की आखरी मुलाक़ात का
आखरी लम्हा आ रहा था . फिर मोहब्बत के इन ज़ज़्बातों को हमेशा के लिये खामोश होना था . एक
दूसरे के प्रेम में डूबे , हम दोनो , कल से होने वाली जुदाई की आग में अभी से जलने लगे थे.


