Episode – 36
मैंने उसके माथे को चूमा तो वह मेरी दोनों आंखों और मेरे हाथों में चुम्बन लेते ज़ोर से रो पडी
और बोली ध्रुव, आज के बाद तुम मेरे अज़ीज़ दोस्त रहोगे . मैंने कहा , हां, मलिका, तुम भी मेरी
केवल अतिप्रिय दोस्त बन जाओगी .
वो मुझको छोड़ कर खुश हैं तो शिकायत कैसी …
अब मैं उसको खुश भी ना देखूं तो मोहब्बत कैसी ….
हमारा एक दूसरे को छोड़कर वापस अपने अपने ठिकाने लौटने का मन नहीं कर रहा था पर अगले दिन
आखरी मुलाकात के लिये अब जुदा होना ज़रूरी था . वह भारी मन से बोली, क्या आप खुद को संभाल
लेंगे तो मैंने उसे एक शेर से जवाब दिया-
उसने जाते हुये बडे गुरूर से कहा ‘मुझे भूल जाओ ‘
हम भी दिल के नबाब थे कह दिया ‘ कौन हो तुम’
जैसा कि तय था मैं उससे मिलने उसके घर गया. उसने मुझे अपने परिवार से मिलवाया. वे मेरी आशंका
के विपरीत , वे सब बड़ी गर्मजोशी से मुझसे मिले व बातचीत करते रहे . फिर हम दोनों उसके उसी
खिड़की वाले कमरे में आ गये जहां से वह मुझे देखकर अदाएं देती थी . मैंने अपने खड़े रहने की जगह
की तरफ तांकाझांकी की तो वह मुस्कुराने लगी . कुछ देर हम इधर- उधर की बातचीत करते रहे . तब
उसने कहा कि वह मुझे बहुत मिस करेगी , मैंने कहा , और शायद मैं किसी दूसरी हसीना में तुम्हारा
अक्स ढूंढूंगा . वह हंस पड़ी , बोली , तुम्हारी इसी अदा पर मैं क्या , आगे ना जाने और कितनी मरेंगी ?
मैं झट से बोल उठा ..
इस जुर्म ए मोहब्बत में , अकेले हम ही नही थे
निगाहें जब भी मिलती थीं , मुस्कुराया तुम भी करते थे
अब तुमने भी लगभग रोते हुए कहा
तुम्हें पा लेते तो किस्सा यहीं खत्म हो जाता
तुम्हें खोया है तो यकीनन कहानी लंबी चलेगी
मुझसे गले लगकर वह ज़ोर से रो पड़ी . मेरी आंखों से भी आंसुओं का सैलाब बहने लगा . अब बिछड़ने
का वक़्त आ गया था . डिनर के बाद उसके घर वालों से आगे फिर से मिलने का वादा कर मैं अपने
होस्टल चले आया .
अगली सुबह वह चली गई पर हमेशा के लिये एक दोस्त बनकर . उस साल नवरात्रि में वह फिर इंदौर
आई . गरबे में दूर से अपनी ख़ूबसूरती व अदाओं से मुझपर और ज़्यादा कहर ढाया , मैं भी दिलफेंक
आशिक़ की तरह आहें भरने का अभिनय करता . पर जब हम दोनों आमने सामने मिलते थे तो अपनी
उस बात पर हंसते पर कभी इससे ज़्यादा नहीं बढे . आगे केवल एक बार मुलाकात हुई , मिलने पर हमने
एक दूसरे को अपने जीवन में आये लोगों के बारे में और अपनी कहानियां-नादानियां बताई. पर एक दूसरे
पर अधिकार की कोई चाहत नहीं दिखाई . मेरी पढ़ाई के बाद मैं पूना चला गया . अपने कोर्स के बाद
वह भी दो साल के लिए विदेश चली गयी. शायद वहीं बस गई , फिर कोई संपर्क नहीं हो पाया. आज
भी सोचता हूँ तो बेहद अच्छी लगती है मेरी वह ‘ एक प्रेम कहानी अधूरी सी ‘ …
क्या पता था इस कदर वो मुझसे ज़ुदा हो जाएगा
ख्वाब में भी उसका मिलना हादसा हो जाएगा


