डेफ क्रिकेट टीम के कप्तान बने अजय चौकसे की कहानी, जो समाज के ताने भी नहीं तोड़ पाई

इंदौर स्पोर्ट्स डेस्क मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के शमशाबाद में रहने वाले अमन चौकसे एक अच्छे क्रिकेटर हैं। आप बताएँगे इसमें क्या खास है। विशिष्ट है क्योंकि वह सुन नहीं सकते हैं। शारीरिक दुर्बलता से हार नहीं मानी। वह लड़ता था, और आज डेफ क्रिकेट टीम का कप्तान है।

13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक बिहार में होने वाली IDCA नेशनल क्रिकेट चैंपियनशिप में वह अपनी टीम को लीड करेगा।अमन एक अद्भुत ऑलराउंडर हैं। उन्होंने जम्मू और उत्तर प्रदेश की मूक बधिर टीमों से भी क्रिकेट खेला है। मित्रों और परिवार में उनके कप्तान बनने की सफलता से उत्साह है।जब अमन छह महीने का था, तब परिवार को पता चला कि वह बोल और सुन नहीं सकता था। परिवार को उनकी इस स्थिति का पता चला। समाज के दबाव से मुक्त होने के लिए परिवार सबसे बड़ा सहारा था।

उन्हें कई जगह दिखाया गया, लेकिन वे कहीं भी नहीं आराम पाए। उनका एडमिशन स्पेशल बच्चों के स्कूल में हुआ, लेकिन वह वहां लंबे समय तक नहीं रुक पाए। वह चार साल की उम्र में उसी स्कूल में फिर से दाखिला लिया गया।

उस समय उनकी मां भोपाल में उनके साथ थीं। मां बाहर उनका इंतजार करती थीं जब अमन क्लास में पढ़ रहे थे। पिता ने शांति का पालन-पोषण किया

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