तमिलनाडु की राजनीति इन दिनों किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी लग रही है. थालापति विजय की राजनीतिक एंट्री और मुख्यमंत्री स्टालिन पर उनके तीखे बयानों ने राज्य की सियासत में जबरदस्त ‘मिर्च-मसाला’ भर दिया है. वैसे तमिलनाडु की राजनीति का सिनेमाई इतिहास गवाह है कि यहाँ स्क्रीन पर जो तलवार चलाता है, वो अक्सर कुर्सी पर भी बैठ जाता है. अब तक स्टालिन साहब ‘द्रविड़ मॉडल’ की ऐसी लोरी सुना रहे थे कि विपक्ष को भी नींद आ रही थी पर एक्टर थालापति विजय ने आकर सीधा ‘रिश्वत और भ्रष्टाचार’ वाला डायलॉग मार दिया. यह वैसा ही है जैसे किसी शांत भजन मंडली में अचानक कोई रॉक कॉन्सर्ट शुरू कर दे. मुख्यमंत्री को लगा था कि उनके बेटे ‘उदयनिधि’ की पारी सुरक्षित है, पर विजय ने ‘नो बॉल’ पर छक्का जड़ दिया है. विजय ने स्टालिन के दोस्तों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें ‘रिश्वत’ और ‘भ्रष्टाचार’ को टॉप पर रखा है. यह गहरी बात है क्योंकि राजनीति में दोस्त अक्सर वही होते हैं जो दिखाई नहीं देते. डीएमके का कुनबा इस बात पर हैरान है कि “भाई, ये तो हमारे घर की बात थी, तुमने चौराहे पर क्यों चिल्ला दी?” मैं तो कहूंगा , उदयनिधि का ‘उदय’ या स्टालिन का ‘सेटअप’, थलपति ने बिगाड़ दिया पूरा ‘गेटअप .
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , पूरब टाइम्स


