छत्तीसगढ़ के ‘धान के कटोरे’ में अब अनाज नहीं, बल्कि ‘चमत्कार’ भरा है। कबीरधाम से महासमुंद तक हमारे प्रदेश के चूहे इतने कर्मठ हो गए हैं कि हर घंटे 11 क्विंटल धान डकार रहे हैं। ये साधारण मूषक नहीं, बल्कि ‘मैनेजमेंट गुरु’ हैं, जो बिना ट्रक और मजदूर के, रोजाना 272 क्विंटल धान गायब करने की दिव्य शक्ति रखते हैं। धन्य है वह जठराग्नि, जो 12 करोड़ से ज़्यादा का धान ऐसे पचा गई जैसे प्रसाद हो! हैरानी की बात है कि इन चूहों को न अपच होती है, न इनका पेट भरता है। असल में ये ‘अदृश्य तत्व’ इतने कुशल हैं कि फाइल पर हस्ताक्षर होते ही धान ‘हवा’ बन जाता है। जब रक्षक ही भक्षक बनकर ‘धान के कटोरे’ में छेद कर दें तो जवाबदेही के नाम पर केवल जांच का झुनझुना बचता है। जब तक इन दो पैरों वाले चूहों के गले में घंटी नहीं बांधेगी, तब तक कटोरा खाली ही होता रहेगा और व्यवस्था डकार लेती रहेगी। आपको क्या लगता है ?
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स


