जिस देश में खुद अल्पसंख्यकों के घरों में आग लगी हो और सरकार पानी की जगह पेट्रोल छिड़क रही हो, वहां के खिलाड़ी भारत में ‘असुरक्षा’ का रोना रो रहे हैं. यह तो सदी का सबसे बड़ा विडंबनापूर्ण चुटकुला है! यह डर सुरक्षा का नहीं, बल्कि ‘आईने’ का है. हर बार वर्ल्ड कप में जाकर, ग्रुप स्टेज से ही ‘बेआबरू’ होकर लौटने का, बांग्लादेश का जो कंसिस्टेंट रिकॉर्ड रहा है, उसे तोड़ने का इससे नायाब तरीका और क्या हो सकता था? उन्होंने सोचा, “मैदान में हारने से अच्छा है, बाहर बैठकर ही शोर मचाया जाए.” यह तो वही बात हुई कि छात्र परीक्षा देने इसलिए नहीं गया क्योंकि उसे डर था कि कहीं ‘पेन’ न चोरी हो जाए, जबकि असल डर तो ‘फेल’ होने का था! सच तो यह है कि उन्हें भारत के दर्शकों से नहीं, बल्कि भारतीय गेंदबाजों की ‘यॉर्कर’ से अपनी टांगें टूटने का खतरा ज्यादा लग रहा था . पाकिस्तान का बांग्लादेश के समर्थन में उतरना ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ कहावत का लाइव प्रसारण है. पाकिस्तान सोच रहा है, “चलो अच्छा हुआ, इस बार बांग्लादेश से हारने की बेइज्जती नहीं झेलनी पड़ेगी.” मेरे हिसाब से सुरक्षा’ तो बस एक बहाना है, असली मकसद तो अपनी इज्जत का ‘फालूदा’ होने से बचाना है.
इंजी. मधुर चितलांग्या , संपादक, पूरब टाइम्स


