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Wednesday, March 25, 2026
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गुस्ताखी माफ

एक लड़का नंगे लहूलुहान पांवों के साथ बाज़ार के बीच से चला जा रहा था. उसका चेहरा चमक रहा था और सिर पर बड़ी महंगी टोपी पहने था, लेकिन पांवों में ना जूता और ना चप्पल. किसी सयाने आदमी ने उससे पूछा -भले आदमी, चेहरा चमक रहा है और ये टोपी कितने की ले ली? लड़का बोला- फेशियल कराने व टोपी खरीदने में पूरे दो हज़ार रुपए लगे, चाचा. आदमी उसकी हालत और टोपी की कीमत देखकर हैरान था, बोला- इतना अधिक खर्च !!लड़के ने इतराकर जवाब दिया- मेरे पास तो सौ ही थे. बाकी के उधार में मिल गये. अब वह सयाना आदमी बोला- तो भाई कुछ पैसे की टोपी और कुछ के जूते ले लेने थे ना. पांव देखो अपना. बस लड़के ने आव देखा ना ताव. शोर मचा दिया. चिल्लाने लगा कि ये आदमी मुझसे जलता है. मेरी तरक्की से जलता है . (इस वृतांत का संबंध छ.ग. सरकार के द्वारा उधार लेकर, मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वाहवाही लूटने और बेसिक इंफ्रा स्ट्राक्चर पर खर्च नहीं करने से, नहीं है)
इंजी. मधुर चितलांग्या
संपादक , दैनिक पूरब टाइम्स

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