असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का बचाव करते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय दिलाना है।
सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक हितों से ऊपर सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी और विधानसभा के पहले ही सत्र में धार्मिक अल्पसंख्यक महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से यूसीसी विधेयक पेश किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम यहां सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं आए हैं। अपने समर्थकों या राजनीतिक हितों के लिए कुछ भी करने से पहले, हमने सामाजिक न्याय के लिए समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करेगा और विवाह, उत्तराधिकार और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित मामलों में उनके अधिकारों को मजबूत करेगा।
उन्होंने विपक्षी दलों पर विधेयक के उद्देश्य को लेकर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूसीसी अल्पसंख्यक समाजों की महिलाओं को अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। विधानसभा में हुई पिछली बहस को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने रायजोर दल के एक विधायक के साथ हुई अपनी पिछली बातचीत का जिक्र किया।


