स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पॉक्सो केस में सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) के तहत दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दी गई थी। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने कहा कि क्षमा करें, हम इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। 25 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को पीओसीएसओ अधिनियम के तहत उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में अग्रिम जमानत दे दी।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने प्रथम शिकायतकर्ता और याचिकाकर्ताओं (स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और शिष्य) दोनों को इस संबंध में मीडिया के समक्ष कोई भी बयान देने से रोक दिया। न्यायालय ने दोनों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

यह मामला प्रयागराज के झूंसी पुलिस स्टेशन में पीओसीएसओ अदालत के निर्देशों के बाद दर्ज की गई एफआईआर से संबंधित है, जिसमें आरोपी द्वारा कई ‘बटुकों’ (युवा शिष्यों) के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है।

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