5 मार्च को चुनाव आयोग द्वारा बिगुल फूंके जाने के ठीक 46 दिन बाद, पश्चिम बंगाल के हालिया इतिहास का सबसे तीखा और हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबला बुधवार को समाप्त हो गया। दो चरणों में हुए इस मतदान ने न केवल राजनीतिक गर्मी को चरम पर पहुँचाया, बल्कि 92.47 प्रतिशत मतदान के साथ एक नया इतिहास रच दिया है।
अब सभी की निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। इस चुनाव में बंगाल के मतदाताओं ने घर से निकलकर लोकतंत्र के उत्सव में जिस तरह भाग लिया, उसने पिछली सभी सीमाओं को लांघ दिया।
यह चुनाव केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गया है कि राज्य सचिवालय नबान्न तक कौन पहुंचेगा, बल्कि यह इस बात पर जनमत संग्रह बन गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 वर्षों के शासन के बाद भी बंगाल की केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी रहती हैं या नहीं, और क्या लगातार चौथी जीत उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा स्थापित कर सकती है, या फिर भाजपा को राज्य में सत्ता का रास्ता मिल गया। दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया।


