पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आयोजित प्रेस वार्ता में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा कि इस अभियान ने साबित कर दिया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश की सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि आज भारत के रक्षा उपकरणों का पैंसठ प्रतिशत से अधिक हिस्सा देश में ही तैयार किया जा रहा है और यही आत्मनिर्भर क्षमता इस अभियान की सफलता का मजबूत आधार बनी।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ लंबी और निरंतर लड़ाई की शुरुआत था। भारत अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर स्तर पर निर्णायक, पेशेवर और जिम्मेदार तरीके से कार्रवाई करता रहेगा।
इस अवसर पर उन्होंने प्रसिद्ध कवि दुष्यंत कुमार की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा, “सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी घटना का अंत नहीं, बल्कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई नीति और नई दृढ़ता का आरंभ था।
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने अभियान की रणनीति पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत ने बेहद संतुलित और नियंत्रित सैन्य दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय तक चल रहे युद्धों और संघर्षों के विपरीत भारत ने सीमित लेकिन प्रभावी सैन्य कार्रवाई की।
भारतीय सेना ने तेजी और सटीकता के साथ अपने निर्धारित लक्ष्य हासिल किए और उसके बाद तब संघर्ष विराम का निर्णय लिया गया जब पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हुआ और उसने कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया।


