पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राजनीतिक करियर के सबसे भीषण अंतर्विरोध और संकट के दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक कलह अब पूरी तरह सड़क पर आ गया है।
पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 19 सांसदों ने खुली बगावत कर दी है। इंडिया टुडे को बागी सांसदों के उस ग्रुप की सीक्रेट चिट्ठी की कॉपी मिली है, जो उन्होंने लोकसभा स्पीकर को सौंपी है। इन सांसदों ने खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताते हुए संसद में एक अलग गुट बनाने और पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने का फैसला किया है। इस बगावत के बाद ममता बनर्जी के पाले में अब केवल 9 सांसद ही बचे हैं।
18 मई की तारीख वाली इस चिट्ठी पर 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इन सांसदों ने एक अलग संसदीय गुट बनाने का समर्थन किया है और अब TMC के चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोक रहे हैं। उनका कहना है कि वे ही “असली” तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से केवल नौ ही बागी गुट से बाहर बचे हैं, हालांकि कुछ सदस्यों की स्थिति अभी भी साफ़ नहीं है।
हस्ताक्षर करने वालों में ये शामिल हैं:
काकोली घोष दस्तीदार
शताब्दी रॉय
बापी हलदर
डॉ. शर्मिला सरकार
प्रसून बनर्जी
जगदीश बर्मा बसुनिया
असित कुमार मल
अरूप चक्रवर्ती
रचना बनर्जी
सायनी घोष
खलीलु्र रहमान
अबू ताहिर खान
यूसुफ़ पठान
मिताली बाग
माला रॉय
कालीपदा सोरेन
दीपक अधिकारी
जून मालिया
पार्थ भौमिक
सूत्रों ने बताया कि बागी सांसदों ने स्पीकर को एक अलग संसदीय समूह के तौर पर काम करने के अपने इरादे के बारे में बता दिया है। बागी गुट का कहना है कि उनका BJP या NDA में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है, बल्कि वे स्वतंत्र रूप से काम करेंगे और पश्चिम बंगाल के हितों के लिए काम करेंगे।


