तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार को राज्य के लंबे समय से चले आ रहे पारंपरिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सदन की कार्यवाही की शुरुआत की गई। सत्र की शुरुआत राज्य गीत यानी तमिल एंथम ‘तमिल थाई वाज़्थु’ के गायन से हुई, जबकि इसका समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गानों के क्रम को लेकर उपजे एक बड़े राजनीतिक विवाद के ठीक एक महीने बाद सामने आया है।
बृहस्पतिवार को विधानसभा सत्र में दशकों पुरानी परंपरा को दोहराया गया। तमिलनाडु में यह स्थापित परंपरा रही है कि सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत तमिल भाषा की जननी की स्तुति में गाए जाने वाले गीत ‘तमिल थाई वाज़्थु’ से होती है, और समापन हमेशा राष्ट्रगान से किया जाता है।
इस परंपरा से हटकर किए गए बदलाव पर विपक्षी दलों और TVK का समर्थन करने वाले कई सहयोगियों ने तुरंत आपत्ति जताई। विवाद तब और बढ़ गया जब शपथ ग्रहण समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय के जनवरी 2026 के निर्देश के अनुसार ‘वंदे मातरम’ का पूरा छह-पद वाला संस्करण बजाया गया।
234 सदस्यीय विधानसभा में विजय को बहुमत दिलाने में मदद करने वाले कई सहयोगियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। CPI के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने तर्क दिया कि सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाज़्थु’ को हमेशा सर्वोच्च स्थान दिया गया है और उन्होंने सरकार से इस पर स्पष्टीकरण मांगा।


