एक तरफ जहां भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित करने की होड़ में है, वहीं एक नए वैश्विक आकलन ने चेतावनी दी है कि देश के नए और आधुनिक डेटा सेंटर्स पर जलवायु से जुड़ी आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
जलवायु जोखिम का आकलन करने वाली कंसल्टेंसी फर्म ‘XDI’ (क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव) द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक दुनिया का ध्यान मुख्य रूप से डेटा सेंटर्स की ऊर्जा और पानी की भारी जरूरतों पर ही केंद्रित रहा है। लेकिन भीषण गर्मी और खराब मौसम के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान जैसे भौतिक जलवायु जोखिम इस सेक्टर के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं।
‘2026 ग्लोबल एनालिसिस ऑफ प्लान्ड डेटा सेंटर्स फॉर फिजिकल क्लाइमेट रिस्क एंड रेजिलिएंस’ नामक इस रिपोर्ट में दुनियाभर में बनने वाले 2,595 प्रस्तावित डेटा सेंटर्स का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इन डेटा सेंटर्स पर जलवायु परिवर्तन से होने वाले सीधे नुकसान, भीषण गर्मी की वजह से इनके संचालन में आने वाली रुकावटों और बिजली, पानी व परिवहन नेटवर्क जैसे बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के ठप होने से पैदा होने वाले बड़े खतरों का सटीक आकलन करना है।


