सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सिंधु के पानी पर दिया ‘वॉर वार्निंग’

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में कहा कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty/IWT) के तहत पाकिस्तान के हिस्से के पानी की सुरक्षा के लिए “हर जरूरी कदम” उठाए जाएंगे. यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए संधि को फिलहाल स्थगित रखने का फैसला किया है.

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में भारत के खिलाफ युद्ध का रास्ता चुन सकता है? क्या उसके पास भारत पर दबाव बनाने के ऐसे विकल्प हैं, जिनसे नई दिल्ली अपना फैसला बदलने पर मजबूर हो जाए?

रक्षा और सामरिक नजरिए से पाकिस्तान के पास कई विकल्प जरूर हैं, लेकिन लगभग हर विकल्प की अपनी गंभीर सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक सीमाएं हैं.पाकिस्तान के विदेश मंत्री का कहना रहा है कि सिंधु जल संधि को “अवैध रूप से” निलंबित नहीं किया जा सकता और पानी रोकने की किसी भी कोशिश को “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा. हालांकि, यह रुख मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक दलीलों पर आधारित है. व्यावहारिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने अपनी जल व्यवस्था से जुड़ी बड़ी चुनौतियां भी हैं.

पाकिस्तान के प्रमुख बांधों: मंगला और तर्बेला की जल भंडारण क्षमता सीमित है.
देश की करीब 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर करती है, जबकि उपलब्ध मीठे पानी का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा इसी नेटवर्क के जरिए उपयोग में आता है.
ऐसे में यदि भविष्य में भारत पानी के प्रवाह को कम करने में सक्षम होता है, तो पाकिस्तान में कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलविद्युत उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है.
इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान के जल हितों को निशाना बनाया गया तो इसे गंभीर कार्रवाई माना जाएगा. वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी सैन्य उकसावे या हमले का जवाब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति के अनुरूप दिया जाएगा.

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