चीन अब केवल अपने हथियार सीधे बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पाकिस्तान को अपना रणनीतिक साझेदार बनाकर दुनिया के नए रक्षा बाजारों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक मिडिल ईस्ट फोरम की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अब चीन के लिए हथियारों का बड़ा गेटवे बन चुका है. यानी चीन अपने रक्षा उत्पादों को दुनिया के कई देशों तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक इस रणनीति की सबसे बड़ी मिसाल पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच प्रस्तावित 4 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा समझौता है. इस सौदे में 16 JF-17 थंडर लड़ाकू विमान, प्रशिक्षण विमान और अन्य सैन्य उपकरण शामिल बताए गए हैं. खास बात यह है कि JF-17 विमान चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है. अगर यह सौदा पूरा होता है तो इससे लीबिया पर लगे संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंधों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.
चीन के कब्जे में पाकिस्तान
रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा चीन से आया. इससे साफ है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत अब पहले की तुलना में कहीं अधिक चीनी हथियारों पर निर्भर हो चुकी है.
हालांकि पाकिस्तान के पास अभी भी अमेरिका के एफ-16 लड़ाकू विमान हैं और उसे समय-समय पर अमेरिकी सैन्य सहायता भी मिलती है, लेकिन उसकी नई सैन्य खरीद का बड़ा हिस्सा चीन से जुड़ा हुआ है. पाकिस्तान न केवल JF-17 लड़ाकू विमान, बल्कि चीन के ड्रोन, HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरणों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दे रहा है.


