अपनी जनता को आटा तक नहीं खिला पा रहे और दुनिया के सामने कटोरा लेकर खड़े हैं। लेकिन इसके साथ ही पड़ोसियों के घर में घुसकर बमबारी कर रहे हैं। जिस पाकिस्तान की अपनी जमीन आतंकियों की फैक्ट्री बनी हुई है, उसी की बुजदिल सेना ने आधी रात के अंधेरे में अफगानिस्तान के मासूम लोगों पर हवाई हमले कर दिए। 11 मासूम बच्चे, वो बच्चे जिन्होंने अभी दुनिया देखी तक नहीं थी, उन्हें पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने मलबे में दफन कर दिया।
पाकिस्तान समझ रहा है कि वो ताकतवर है। नहीं, यह उसकी ताकत नहीं बल्कि हार की बौखलाहट है। दरअसल, बीती रात पाकिस्तानी एयरफोर्स के विमानों ने अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर को पार किया। जैसा कि अफगानिस्तान का दावा है और तालिबान ने इसकी पुष्टि भी की। निशाना कोई छावनी नहीं थी। निशाना थे कुनार खोस और पकिका के वो रिहाइशी इलाके जहां आम अफगानी नागरिक सुकून से रहते थे।
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने साफ कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की संप्रभुता को चुनौती दी है। पाकिस्तान ने उन घरों पर बम गिराए जहां परिवार सो रहे थे। यह हमला नहीं यह सरेआम कत्लेआम है। पाकिस्तान जो कल तक मुस्लिम उमा की दुआही देता था आज उसी ने बच्चों की जान ले ली। अब दुनिया पूछ रही है जिस देश के पास अपने जहाजों में तेल डलवाने के पैसे नहीं है वो युद्ध का नाटक क्यों कर रहा है? दरअसल यह पाकिस्तान की पुरानी फितरत है। जब घर में आग लगी हो तो पड़ोसी पर पत्थर फेंको।


