अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के इलाके में ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं। ये हमले दस दिन पहले हुए हमलों की तुलना में “चार से पांच गुना ज़्यादा बड़े और ताकतवर” हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि व्यापारिक जहाजों पर ईरान के दोबारा शुरू हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है, और यह ऑपरेशन अगले कुछ घंटों तक और चल सकता है।
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के विशाल अंतिम संस्कार के लिए लाखों ईरानी सड़कों पर उतरे हुए हैं। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री व्यापारिक मार्ग में तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद, अमेरिका ने ईरानी तेल पर दी गई अस्थायी प्रतिबंधों की छूट को भी रद्द कर दिया है। इससे तेहरान पर दबाव और बढ़ गया है, जबकि वह मध्य पूर्व में युद्ध को खत्म करने के लिए वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल में हुए संघर्षविराम के बाद से ईरान पर यह अमेरिका का सबसे भीषण हमला है। इससे तेहरान और वाशिंगटन के बीच बदले की एक नई जंग शुरू होने का खतरा पैदा हो गया है, जो तीन हफ्ते से भी कम समय पहले दोनों देशों के बीच हुए समझौते (रूश) को खतरे में डाल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में ईरान के एयर-डिफेंस सिस्टम, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, तटीय निगरानी प्रणालियों, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल ठिकानों, बंदरगाहों और ड्रोन लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास और सीरिक जैसे बंदरगाह शहरों के साथ-साथ केश्म द्वीप पर भी भारी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।
अमेरिका के निशाने पर और भी कई ठिकाने
अमेरिका के एक अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि इन हमलों का मकसद जून के आखिर में किए गए जवाबी हमलों के मुकाबले लगभग आठ गुना ज़्यादा ठिकानों को निशाना बनाना था। अधिकारी ने कहा कि ईरान बात नहीं मान रहा है, इसलिए अमेरिका अब सख्ती बढ़ा रहा है। एक और अधिकारी ने ष्टहृहृ को बताया कि ये हमले ईरान के लिए सज़ा थे, क्योंकि उसने विवादित समुद्री रास्ते के पास कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड


