साउथ एशिया के दो महाबलियों यानी भारत और चीन ने आखिरकार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी बरसों पुराने बवाल को हमेशा के लिए दफन करने का पूरा मन बना लिया है. बीजिंग की धरती पर दोनों देशों के दिग्गज अधिकारियों के बीच घंटों तक मैराथन मीटिंग का दौर चला.
भारत और चीन के बीच बॉर्डर मामलों को लेकर हुई इन कूटनीतिक बैठकों में सरहद पर हमेशा के लिए शांति बनाए रखने को लेकर तीन ऐसी बड़ी ‘रेड लाइन’ तय कर दी गई हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक सहमति बन गई है. इस एक खबर ने साउथ एशिया के सियासी गलियारे में तहलका मचा दिया है.
बीजिंग में आमने-सामने बैठे भारत-चीन के हाई लेवल अधिकारी
इस सेंसेटिव और रणनीतिक बैठक की कमान दोनों देशों के अनुभवी राजनयिकों के हाथों में थी. चीनी विदेश मंत्रालय की डायरेक्टर जनरल होउ यानकी और भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने मिलकर इस वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 35वें दौर की महाबैठक की सह-अध्यक्षता की.
टेबल पर सिर्फ विदेश मंत्रालय के ही लोग नहीं बैठे थे, बल्कि दोनों देशों के मिलिट्री, होम और इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के बड़े-बड़े सूरमा पूरी तैयारी और भारी-भरकम फाइलों के साथ आमने-सामने डटे हुए थे! अफसरों की यह भारी फौज ही गवाही दे रही है कि इस महाबैठक का असर कितना तगड़ा होने वाला है.


