ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पड़ोसी देश का सबसे बड़ा कबूलनामा-मृतक आतंकवादी नहीं बल्कि एक उद्देश्य के लिए लड़ने वाले ‘योद्धा’ थे

ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी से कुछ दिन पहले, लश्कर-ए-तैबा से जुड़े एक कार्यक्रम में एक पाकिस्तानी नेता की कथित टिप्पणियों ने आतंकी समूहों के साथ पाकिस्तान के संबंधों की फिर से जांच शुरू कर दी है। नेता ने दावा किया कि पिछले साल भारत द्वारा हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर जैसे नामित आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना ने उनके लिए लड़ाई लड़ी।

पाकिस्तानी नेता शाहिर सियालवी ने कथित तौर पर लश्कर-ए-तैबा से जुड़े एक कार्यक्रम में ये टिप्पणियां कीं, जहां उन्होंने कहा कि “पहली बार पाकिस्तानी सेना ने हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर के लिए लड़ाई लड़ी। लश्कर-ए-तैबा के संस्थापक हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हैं। खबरों के अनुसार, इस कार्यक्रम में मुज़म्मिल इकबाल हाशमी भी शामिल थे, जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका ने

आतंकवादी घोषित किया है। सियालवी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि भारत ने मुरीदके और बहावलपुर में उन ठिकानों पर हमले किए थे, जहां कई आतंकवादी मारे गए थे। उन्होंने दावा किया कि हमलों के बाद, पाकिस्तान ने अपने संदेश में बदलाव करते हुए मारे गए लोगों को आतंकवादी के बजाय “स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में पेश किया।

हमलों के बाद अंतिम संस्कार को लेकर दावे
रिपोर्ट किए गए बयानों के अनुसार, मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार मौलवियों द्वारा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना के धार्मिक अधिकारियों द्वारा किए गए थे। सियालवी ने आगे दावा किया कि वर्दीधारी कर्मियों ने शवों को कंधा दिया, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संकेत देने का प्रयास बताया कि मृतक आतंकवादी नहीं बल्कि एक उद्देश्य के लिए लड़ने वाले “योद्धा” थे। यदि ये बयान सत्यापित होते हैं, तो इससे भारत के उस पुराने आरोप को और बल मिलने की संभावना है कि पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अपनी धरती से संचालित आतंकी संगठनों का समर्थन करता है।

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