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Sunday, March 8, 2026
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रायपुर: प्रधान आरक्षक ने फांसी लगाकर दी जान, विभागीय उत्पीड़न पर उठे सवाल

राजधानी रायपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पुलिस विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक राम आसरा पोरते ने पुलिस लाइन परिसर स्थित सामुदायिक भवन के पास फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न सिर्फ विभाग को हिला दिया है, बल्कि परिजनों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।

घटना का विवरण

जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह पुलिसकर्मियों ने सामुदायिक भवन के पास प्रधान आरक्षक का शव फंदे पर लटका देखा। तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने पंचनामा कार्रवाई की और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया।

मानसिक दबाव में थे प्रधान आरक्षक

सूत्रों के अनुसार मृतक राम आसरा पोरते लंबे समय से मानसिक दबाव में थे। आरोप है कि वाहन शाखा प्रभारी आदिराम सिंह (एमटीओ) द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने दबी जुबान में बताया कि मृतक को ड्यूटी से गैरहाजिर दिखाया जा रहा था और अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा था।

परिजनों का आरोप

परिवारजनों का कहना है कि राम आसरा ड्यूटी के प्रति ईमानदार और समर्पित थे। लेकिन जब उन्हें बिना कारण हटाया गया और लगातार दबाव बनाया गया, तो यह बोझ वह सहन नहीं कर पाए। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका दर्द साफ तौर पर विभागीय उत्पीड़न की ओर इशारा करता है।

पुलिस महकमे पर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और आंतरिक अनुशासन पर सवाल खड़े करती है। अक्सर देखा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के अनुचित व्यवहार और विभागीय दबाव के कारण पुलिसकर्मी मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। कई बार यह तनाव आत्महत्या जैसे कदम उठाने तक ले जाता है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। वरिष्ठ अधिकारी मामले की हर पहलू से छानबीन कर रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आत्महत्या के पीछे व्यक्तिगत कारण थे या वास्तव में विभागीय उत्पीड़न ने राम आसरा को मजबूर कर दिया।

विभाग में आक्रोश

इस घटना के बाद पुलिसकर्मियों के बीच आक्रोश और निराशा का माहौल है। जवानों का कहना है कि यदि विभागीय उत्पीड़न पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में इस तरह की और घटनाएं हो सकती हैं।


👉 यह मामला पुलिस विभाग के आंतरिक माहौल पर गंभीर सवाल उठाता है और साफ संकेत देता है कि समय रहते सुधार नहीं किए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

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