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Sunday, March 22, 2026
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गड़बडिय़ों को कब तक छुपा पायेगा जन सूचना अधिकारी… मामला है, बजरंग महिला महाविद्यालय, रायपुर का..

पूरब टाइम्स, रायपुर . महाविद्यालय यानि कॉलेज, विद्या का ऐसा मंदिर होता है, जहां से विद्यार्थी विद्या अर्जन कर, भविष्य में अपना कैरियर के लिये मैदान पर कूद पड़ता है. क्लहने का तत्पर्य यह है कि जिस महाविद्यालय में पढ़ाई का स्तर जितना अच्छा होता है, वहां के बच्चे प्रतियोगी परीक्षा में उतनी ज़्यादा सफलता पाते हैं . प्रदेश में सरकारी महाविद्यालय इसलिये हैं ताकि हर वर्ग व समाज के लोग बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें. इस कार्य के लिये सरकारी महाविद्यालयों की आधार भूत संरचना, स्टाफ व नियमित क्रियाकलापों के लिये सरकार करोड़ों रुपये का अनुदान देती है. शिक्षा के इस मंदिर में पारदर्शिता इसलिये बेहद आवश्यक है ताकि सरकार की मंशा के अनुसार वहां का स्टाफ, बेहतर शिक्षण दे सके. किसी भी कॉलेज के कार्यशैली में पारदर्शिता का अभाव आर्थिक भ्रष्टाचार के अलावा कर्मचारियों की नीति-रीति में भी गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है. जानकारी के अनुसार बजरंग महिला महाविद्यालय में विधि अपेक्षित पारदर्शिता का पूर्णत: अभाव दिखता है, जिसमें वहां के जन सूचना अधिकारी समेत प्राचार्य पर भी उंगलियां उठ रही हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट

वैसे तो शासकीय महाविद्यालयों का कामकाज शत प्रतिशत पारदर्शिता से किया जाना चाहिए क्योंकि अध्यापन, शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अलावा शासकीय महाविद्यालय अन्य कोई गतिविधि नहीं करते है लेकिन शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला का सूचना अधिकारी महाविद्यालयों वित्तीय व्यवहारों संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाने की मंशा वाली प्रतिक्रिया देकर प्रश्नांकित करने वाली विषम विधिक परिस्थितियों को उत्पन्न कर दी है . जिसके कारण यह कहे जाने की परिस्थिति उत्पन्न हो गई है कि महाविद्यालय का प्राचार्य कार्यालय कुछ छिपाना चाहता जो कि अगर उजागर होगा तो निश्चित तौर पर आर्थिक अनियमितताओं को बेपर्दा हो जायेंगी और आर्थिक अनियमितता जांच के दायरे में आ जायेगी ।

स्वाभाविक मानवीय प्रवृत्ति है कि जब वह गलती करता है या कोई आर्थिक घोटाले करता है तो उसको छिपाने का भरसक प्रयास करता है. शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय के प्राचार्य कार्यालय द्वारा दी गई प्रतिक्रिया ऐसे ही व्यथित करने वाले आपराधिक प्रयास का उदाहरण है. उल्लेखनीय है कि विगत दिनों महाविद्यालय की प्रशासकीय कार्यवाहियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने वाली जानकारी सूचना अधिकारी से मांगी गई थी. जिस पर प्रतिक्रिया करते हुए सूचना अधिकारी ने गड़बड़ीपूर्ण और प्रशासकीय कर्तव्यनिष्ठा को विधिवत चुनौती देने वाले विषयवस्तु का लेख कर प्रतिक्रिया दी है और वांछित दस्तावेज नहीं दिए जिसके बाद प्राचार्य कार्यालय की प्रशासकीय मंशा में खोट होने का मामला तर्क संगत आधार के साथ सुर्खियों में स्थान बनाने की दिशा में बढऩे लगा है.

शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य की छवि एक आदर्श छवि मानी जाती है क्योंकि सभ्य समाज का यही वह व्यक्तित्व होता है जो आने वाले समय के नागरिकों को गढ़ता है. इसी उच्च गरिमापूर्ण जन अपेक्षाओं को क्या शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला की प्राचार्य अपने प्रशासकीय कार्य व्यवहार से वास्तविकता परख बना पायेगी ? इस प्रश्न का उत्तर आने वाले समय में तब स्पष्ट होगा जब प्राचार्य की अभिलिखित प्रतिक्रिया जन सूचना अधिकारी के अनियमित और विधि विपरीत प्रतिक्रिया के विषय में आयेगी. जन सूचना अधिकारी ही दमनकारी प्रवृत्ति वाली प्रशासकीय प्रतिक्रिया न सिर्फ आर्थिक व्यवहारों की पारदर्शिता को प्रशासकीय बल से दबाने वाली ही बल्कि इसके साथ साथ महाविद्यालयीन छात्रों को यह संदेश देने वाली है , उनका महाविद्यालय विधि निर्देशित प्रशासकीय पारदर्शिता भ्रष्ट कार्य व्यवहार से अतिक्रमण करने वाला है । इस मामले में प्राचार्य की प्रतिक्रिया का इंतजार सभी को है ।

शासकीय महाविद्यालय की प्रशासकीय कार्यवाहियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करवाने पर ही शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासकीय कर्तव्यनिष्ठा को प्रश्नांकित करने वाली परिस्थिति नहीं बनेगी लेकिन शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला महाविद्यालय के सूचना अधिकारी की विधि विरुद्ध प्रतिक्रिया ने स्पष्ट कर दिया है महाविद्यालयों वित्तीय व्यवहारों में गड़बडिय़ों का भरमार है जिसे विधिक चुनौती देने की पहल कर रहा हूं ।
अमोल मालूसरे,सामाजिक कार्यकर्ता

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