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Sunday, March 22, 2026
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देहली पब्लिक स्कूल भिलाई की स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही के दस्तावेज कहां है ?

पूरब टाइम्स , भिलाई . एक समय भिलाई का देहली पब्लिक स्कूल पूरे छत्तीसगढ़ की शान हुआ करती थी . इस विद्यालय का स्तर इतना ऊंचा होता था कि यहां सबसे निचली क्लास में एडमिशन के लिये बेहद कड़ी परीक्षा से बच्चों व पालकों को गुज़रना पड़ता था . समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में , भिलाई स्टील प्लांट की सख्ती और स्कूल के दिल्ली में स्थित उच्चतम मैनेजमेंट की कड़ी निगरानी लचर दिखाई देने लगी है . अब यह विद्यालय आम लोगों की नज़र से अपानी चमक खोते हुए दिखाई देने लगा है . लोग बताते हैं कि  इस विद्यालय में अब कहने के लिये एडमिशन लॉटरी सिस्टम से होता है परंतु फिर भी रसूखदार व पैसे वालों के लिये एडमिशन में गुंजाइश रखी जाती है . अभी भी विद्यालय का लोकल मैनेजमेंट , अपनी पहुंच के आधार पर अपने आप को अनेक सरकारी नियमों व पारदर्शिता के नियमों से परे मानता है . अनेक पालक पढ़ाई के स्तर व फीस वृद्धि से परेशान हैं . स्कूल मैनेजमेंट से लड़ना उनके बस में नहीं है क्योंकि उनके बच्चे उस स्कूल में पढ़ते हैं. स्थानीय मैनेजमेंट व प्राचार्य , किसी भी तरह के सामजिक दायित्व को मानने से इनकार करते दिखते हैं क्योंकि वे किसी से भी मिलना व किसी को भी जवाब देना छोड़ चुके हैं . ऐसी स्थिति में चन्द समाज सेवकों द्वारा पीड़ितों की तरफ से मामलों को उठाना शुरु किया जा चुका है . अब देखने वाली बात यह होगी कि कुछ मामलों को ,  छ.ग. के शिक्षा विभाग को संज्ञान करवाने पर , वह् जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कोई कार्यवाही करता है या नहीं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट …

प्रदेश के सबसे महंगे विद्यालय की स्कूल फीस इतनी ज्यादा है कि इस फीस राशि में सामान्य व्यक्ति का घर चल सकता है . इसलिए यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि किसने और कब इतनी बड़ी राशि की स्कूल फीस का निर्धारण किया और डीपीएस स्कूल फीस द्वारा निर्धारित शुल्क को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के किस अधिकारी ने अनुमोदित किया गया। उल्लेखनीय है कि डीपीएस भिलाई की स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही वर्तमान में पारदर्शिता के दायरे में नहीं है , विडम्बना यह है कि, जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग अपने पदेन जिम्मेदारी को पूरी करेगा क्या ? यह विषय लाचार शिक्षा व्यवस्था के चलते शासकीय कार्यान्वयन पद्धति प्रश्नांकित करने वाली स्थिति में बरसों से है इसलिए शाला प्रबंध समिति डीपीएस भिलाई द्वारा अपने विद्यालय की स्कूल फीस को शासन स्तर से अनुमोदित किए जाने की कार्यवाही को सार्वजनिक नहीं किया जाना,  कई शंकाओं को जन्म दे रहा है ।

डीपीएस भिलाई विद्यालय में अध्ययनरत छात्रों के अधिभावक सबसे ज्यादा राशि वाली स्कूल फीस अदा कर रहें है लेकिन इनके पास स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही के दस्तावेजों प्रमाण नहीं है जिसका कारण यह है कि, जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग और डीपीएस भिलाई विद्यालय की स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही करने वाले दस्तावेजों को लेखबद्ध कर सार्वजनिक पहुंच स्थापित करने की पदेन जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई है । गौरतलब रहे कि, निजी स्कूलों की फीस अनुमोदन कार्यवाही को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत तभी शासकीय मान्यता प्रदान किए जाने के पूर्व जन सामान्य व्यक्ति द्वारा दावा आपत्ति दिए जाने का प्रावधान है उल्लेखनीय है कि यह प्रावधान स्पष्ट करता है स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही पूर्णतः पारदर्शिता से की जाने वाली कार्यवाही है , जिसको प्रावधानुसार सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है ।

बेहद विचारणीय तर्क है कि, प्रदेश में सबसे अधिक स्कूल फीस अदा करने वाले अभिभावकों में से एक डीपीएस भिलाई विद्यालय के छात्रों के माता पिता स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही के प्रमाण हासिल करने से वंचित है ऐसी स्थिति में तो जिले के अन्य निजी स्कूल जहां निम्न आर्थिक स्तर के नागरिकों के बच्चे पढ़ते है वहां के अभिभावक अपने बच्चों की स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही को कैसे जान पाते होंगे गौरतलब रहे कि, स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही का पारदर्शिता ने नहीं होना स्पष्ट करता है की यह मामल गड़बड़ी वाला है और जिला शिक्षा अधिकारी और शाला प्राचार्य मिलकर अभिनियमित प्रावधानों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और प्रशासन मूक दर्शन कर रहा है।

डीपीएस भिलाई विद्यालय की स्कूल फीस अनुमोदन कार्यवाही को सार्वजनिक करने वाले सभी नियम कानून के आधार पर शाला प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी को प्रश्नांकित कर अनुमोदित कारवाही प्रक्रिया से हमारे द्वारा जानकारी मांगी जा रहीं है , पालकों के अधिकार संरक्षण विषयक सुनिश्चित करवाने के लिए न्यायालय भी जाना पड़े तो इसकी तैयारी है।

अमोल मालुसरे,सामाजिक कार्यकर्ता

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