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Wednesday, February 18, 2026
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छ. ग. का जल संसाधन विभाग -श्रमिक अधिकार विषय पर प्रमुख अभियंता के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार की जवाबदेही तय करवायेगी, जन सामान्य की नोटिस!

पूरब टाइम्स, रायपुर. इन दिनों छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता उइके का अनियमित कार्य व्यवहार, आम जनता व मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. बताया यह जा रहा है कि यह प्रमुख अभियंता मदमस्त हाथी की तरह बेलगाम हो कर केवल कतिपय विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों की सुनता है. आम जनता की शिकायतों व नोटिसों को मातहत अधिकारियों को फॉरवर्ड कर, अपनी ज़िम्मेदारी से बुचक जाता है जबकि अनेक संवेदनशील मामलों को निराकृत करना उनकी पदेन ज़िम्मेदारी है. ऐसे ही श्रम विभाग से विधिवत भेजे गए श्रमिकों के अधिकारों पर जल संसाधन विभाग के ठेकेदारों द्वारा अतिक्रमण किये जाने के मामले में भी प्रमुख अभियंता का रवैया बेहद संदिग्ध दिखाई देता है क्योंकि पूरब टाइम्स के द्वारा इसे संज्ञान कराने के बाद भी इसे ठन्डे बस्ते में डाल दिया. केवल इतना ही नहीं प्रेस के प्रतिनिधियों से ऐसे ही मामलों में, अनेक बार, अपने निर्धारित मिलने के समय में भी, मिलने से इंकार कर दिया. यहाँ तक कि अपने वैधानिक कर्तव्यों से सम्बंधित किसी भी लिखित निवेदन का जवाब भी नहीं देने की ज़हमत नहीं उठाते हैं. अनेक लोगों के अनुरोध पर अब मीडिया के माध्यम से इसे अनसुना करने वाले अधिकारी सहित विभागीय सचिव व विभागीय मंत्री को भी संज्ञान में लाया जा रहा है ताकि इनकी कार्यशैली में या तो सुधार आये या फिर शासन इनकी, इस पद पर, उपयुक्तता का विश्लेषण करे. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट..

छत्तीसगढ़ शासन जल संसाधन विभाग की महत्वकांक्षी योजनाओं को पूरा करवाने वाले प्रमुख अभियंता के गैर जिम्मेदाराना कार्य व्यवहार के कारण शासन की छवि धूमिल हो रही है.
इसका पहला कारण है जवाबदेही का अभाव:
प्रमुख अभियंता द्वारा गैर जिम्मेदार अधिकारियों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह नहीं ठहराया जाता है, जिससे वे मनमाने फैसले लेने के लिए प्रेरित हो रहें हैं।
दूसरा कारण हैं भ्रष्टाचार:
प्रशासकीय उदासीन कार्य व्यवहार में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है जो ठेकेदारों की मनमानी को बढ़ावा देती है। जिम्मेदार अधिकारी प्रत्यक्ष परोक्ष रिश्वत लेकर नियमों को तोड़ते हैं और अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं।
तीसरा कारण है इच्छाशक्ति में कमियां:
प्रमुख अभियंता श्रमिक अधिकार संरक्षण की इच्छाशक्ति नहीं रखते हैं इसलिए विभागीय अधिकारी श्रम कानून की गलत व्याख्या करके अपनी मनमानी कर रहें हैं।

चौथा कारण है श्रमिकों की जागरूकता का अभाव:
श्रमिक अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं हैं, जिसके कारण अधिकारियों को उनके साथ मनमानी कर सकने का अवसर मिल रहा हैं।

जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के साथ अनुबंधित ठेकेदारों के द्वारा श्रम कानून विधि निर्देश का अनुपालन कर श्रमिकों के रिकॉर्ड का संधारण नहीं करके श्रमिकों के अधिकार पर अतिक्रमण करने का गैर कानूनी अवसर हासिल किया जा रहा है. जिसका कारण यह है कि प्रमुख अभियंता कार्यालय इस बात की सुनिश्चिता नहीं करता है कि ठेकेदार द्वारा नियोजित श्रमिकों के रिकॉर्ड को ठेकेदार नियमानुसार श्रम विभाग को प्रेषित कर रहा है कि नहीं तथा श्रम विभाग द्वारा जो दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं उनका नियमानुसार अनुपालन ठेकेदार द्वारा क्यों नहीं किया जा रहा है ? इन्हीं दो महत्वपूर्ण विषयों को सामाजिक कार्यकर्ता अमोल मालुसरे के जन हिताय नोटिस विषय सुनिश्चित करवाने की सामाजिक जिम्मेदारी पूरी कर रहें है लेकिन क्या प्रमुख अभियंता कार्यालय नोटिस विषयों पर प्रतिक्रिया करेगा? यह आने वाला समय बतायेगा.

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