धोखाधड़ी कर छात्रवृत्ति हथियाने वाले दोषी कॉलेज प्रबंधन के विरुद्ध एफआईआर क्यों दर्ज हुई ?
क्या सहायक आयुक्त कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास रायपुर छत्तीसगढ़ की जवाबदेही तय हुई ?
क्या सीएसवीटीयू के रजिस्ट्रार की प्रशासकीय लापरवाहियों को बेपर्दा कर दिया गया है ?
पूरब टाइम्स, भिलाई रायपुर. छत्तीसगढ़ का एकमात्र सरकारी तकनीकि विश्वविद्यालय , छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकि विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) है जिसके अधीन प्रदेश के तमाम इंजीनियरिंग व तकनीकि कॉलेज आते हैं. इसकी शुरुआत बेहद अच्छी नियत से की कगी थी कि इससे प्रदेश में तकनीकि शिक्षा का स्तर उच्च गुणवत्ता वाला होगा , प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों पर नकेल कसी जा सकेगी व सरकार के द्वारा चलाई गयी योजनाओं का लाभ विद्यार्थियों को मिल पायेगा. पिछले सालों में इस विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर अनेक सवाल उठने लगे थे पर अब तो आर्थिक अनियमितताओं को आश्रय देने के आरोप भी सीएसवीटीयू के उच्चाधिकारियों पर लगने लगे हैं. पिछले वर्ष से इस प्रकार के कई मामलों की गूंज में से एक मामला था , आदिवासी विकास कार्यलय द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति में घोटाले का मामला. प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आँफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी, खरोरा ( पाईटेक ) में की गई जांच में कॉलेज के उच्च प्रबंधन की मिलीभगत से आदिवासी छात्र की छात्रवृत्ति में गबन कर लिया गया था. इस मामले को प्रमुखता से दुर्ग की समाज सेवी निशा देशमुख ने लोकायुक्त के सामने लाया था. इनके सहयोगी अमोल मालुसरे ने बताया कि यह मामला आदिवासी विकास विभाग के संज्ञान में है और उन्होंने इस कॉलेज तथा अन्य कॉलेजों में इसी तरह के करोड़ों रुपये के आबंटन में संभावित घपले की जांच करने का अनुरोध किया है . ये मामले सीएसवीटीयू द्वारा अनुशंसित होते हैं इसलिये ऐसे घपलों के मामले में सीएसवीटीयू की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता है, यह जांच का विषय है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..
लोक आयुक्त छत्तीसगढ़ ने छात्रवृत्ति हथियाने के मामले में जिस शिकायत का संज्ञान लिया उसका विषय गंभीर था
शिकायतकर्ता अमोल मालुसरे और निशा देशमुख ने अपनी शिकायत में लेख किया था कि, माननीय न्यायालय के कार्य क्षेत्र के अधीन, आरोपित लोकसेवक “सहायक आयुक्त कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास रायपुर छत्तीसगढ़” के पद पर लोक सेवक पदस्थ हैं एवं आरोपित लोकसेवक द्वारा श्रीमान कलेक्टर रायपुर के माद्यम से प्रेषित शासनादेश पत्र क्रमांक/ आ.ला.पो.मै.छा / 187/2024-25 / 6479 नवा रायपुर दिनांक 23/09/2024 से प्र.आयुक्त आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास विभाग अटल नगर नवा रायपुर छत्तीसगढ़ के शानादेश का अनुपालन नहीं किया गया है 7 जिसके कारण शासकीय जांच से दोष सिद्ध किये गए प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आँफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी, खरोरा के प्रबंधकीय अधिकारी के विरुद्ध आदेशित एफ.आई.आर. कार्यवाही से दोषी आपराधि आरोपित लोकसेवक के अनियमित कार्याचरण का लाभ लेकर बचने में सफल हो रहे है 7
प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आँफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी, खरोरा के प्रबंधकीय अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज
छत्तीसगढ़ लोक आयुक्त ने छात्रवृत्ति हथियाने जाने के मामले आदिम जाति विभाग के द्वारा की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेते हुए प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आँफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी, खरोरा के प्रबंधकीय अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए क्योंकि व्यथित छात्र जिसकी छात्रवृत्ति का गबन महाविद्यालय प्रबंध ने किया था. उस छात्र की शिकायत पर आदिम जाति विभाग ने जांच की और महाविद्यालय के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सही बताया था लेकिन इस मामले को दबा दिया गया था जिसे लोकायुक्त छत्तीसगढ़ में चुनौती दी गई तो लोकायुक्त छत्तीसगढ़ ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए ।
सीएसवीटीयू रजिस्ट्रार छात्रवृत्ति गबन मामले की निगरानी करने के लिए क्या कर रहा है ?
लोक आयुक्त छत्तीसगढ़ द्वारा प्रोफेशनल इंस्टिट्यूट आँफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालाजी, खरोरा के प्रबंधकीय अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए जाने के बाद से छात्रवृत्ति गबन मामला सुर्खियों में आया लेकिन इस बड़ी कार्यवाही के बाद सीएसवीटीयू गवर्निंग बॉडी को छात्रवृत्ति हथियाने जाने के मामले में सीएसवीटीयू रजिस्ट्रार ने सूचित कर तकनीकी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ से संबद्धता प्राप्त महाविद्यालय की आर्थिक गतिविधि विशेषकर छात्रवृत्ति मामले की निगरानी करने हेतु स्व-प्रेरणा क्या कार्यवाही की है? यह संज्ञान लिए जाने योग्य विषय है जिसके संबंध में सीएसवीटीयू द्वारा की जा रही गतिविधियों के आधार पर आरोप प्रत्यारोप की परिस्थिति बन चुकी है ।
छात्रवृत्ति गबन मामला बेहद गंभीर अपराध है क्योंकि महाविद्यालय का छात्र भावी नागरिक होता है जिसके छात्र हितों का संरक्षण करना विश्वविद्यालय प्रबंधन का जिम्मेदारीपूर्ण कर्तव्य है परंतु छत्तीसगढ़ लोक आयोग द्वारा दिए गए निर्देशों के संबंध में सीएसवीटीयू रजिस्ट्रार द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किया जाना कई शंकाओं को जन्म देने वाला प्रशासकीय कृत्य है।
अमोल मालूसरे,सामाजिक कार्यकर्ता


