बिल्डरों को सबक सिखाना चाहते हो तो..श्रमिक अधिकार कानून से परिचय बढ़ा लो।

पूरब टाइम्स रायपुर. श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिये भारत सरकार ने अनेक कानून बनाये हैं. जिससे श्रमिकों को पूरा पारिश्रमिक, सुरक्षा व सुविधाएं मिल सकें. श्रम विभाग द्वारा उद्योगों में इन नियमों का पालन कड़ाई से कराया जाता है जिसका एक कारण अनेक उद्योगों में श्रमिकों के संगठन भी हैं जोकि श्रमिकों के अधिकार के लिये, लचर मैनेजमेंट को सब कुछ नियमानुसार करने के लिये दबाव डालते हैं. लेकिन निर्माण कार्य में काम करने वाले श्रमिकों को नियमानुसार उनके अधिकारों को प्राप्त करने से वंचित रहना पड़ता है क्योंकि ना ही उनके पास नियमों की जानकारी होती है और ना ही वे संगठित होते हैं. श्रम विभाग द्वारा, बिल्डरों के पारिश्रमिक देने वाले रेकॉर्ड चेक किये जाते है परंतु उनकी सुरक्षा व सुविधा को नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है. अनेक दुर्घटना केसेस में बीमा कम्पनियों द्वारा त्रुटियां निकाल कर अपेक्षित सहयोग नहीं किया जाता है. अमूनन यही हाल श्रमिकों को नियमानुसार प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में कमी का है. किसी भी समस्या में जानकारी ही बचाव होती है. इसी आधार पर पूरब टाइम्स की यह रिपोर्ट ..

भवन निर्माण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भारत सरकार ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 (BOCW Act) लागू किया है। इस अधिनियम के
तहत बिल्डरों यानी निर्माण परियोजना संचालकों की कई कानूनी बाध्यताएं निर्धारित की गई हैं जिसके तहत बिल्डरों को प्रोजेक्ट कार्यान्वयन का पंजीयन करवाने के साथ – साथ नियोजित श्रमिकों को भुगतान की जाने वाली राशि के ब्यौरा को पारदर्शिता के दायरे में लाने की बाध्यता है। इन विधि निर्देशों का
अनुपालन अधिकांश बिल्डर नहीं कर रहें है । परिणाम स्वरूप भवन एवं अन्य सनिर्माण श्रमिकों को उनके श्रम का विधि अपेक्षित भुगतान नहीं मिल पा रहा है।

1. पंजीकरण और उपकर भुगतान

-निर्माण परियोजना शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

-परियोजना लागत का 1% से 2% तक उपकर राज्य कल्याण बोर्ड को जमा करना होता है।

2. श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य

-कार्यस्थल पर सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करना और सुरक्षा समिति का गठन करना आवश्यक है।

-श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण, जैसे हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, मास्क आदि की व्यवस्था करना अनिवार्य है।

3. मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना

-निर्माण स्थल पर पेयजल, शौचालय, मूत्रालय, क्रेच, प्राथमिक चिकित्सा, कैंटीन और आवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

4. कार्य समय और मजदूरी

– श्रमिकों के कार्य घंटे तय करना और ओवरटाइम के लिए अतिरिक्त मजदूरी देना अनिवार्य है।

-न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत भुगतान सुनिश्चित करना होता है।

5. श्रमिकों का पंजीकरण और कल्याण

– श्रमिकों को राज्य कल्याण बोर्ड में पंजीकृत कराने में सहयोग करना।

– पंजीकृत श्रमिकों को दुर्घटना बीमा, चिकित्सा सहायता, शिक्षा, पेंशन, मातृत्व लाभ आदि योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करना।

6. अतिरिक्त शासकीय पहलें

-सरकार ने ई-श्रम पोर्टल और BOCW MIS पोर्टल जैसे डिजिटल माध्यमों से श्रमिकों की पहचान और लाभ वितरण को आसान बनाया है।जिसका वेबसाइट लिंक है https://bocw.shramsuvidha.gov.in/

–  स्व-प्रमाणन, स्थानीय अधिकारी नियुक्ति, और शिविरों के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल किया गया है।

– भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 (BOCW Act) के तहत यदि बिल्डर या निर्माण परियोजना संचालक श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी दंड का प्रावधान है।

7. पंजीकरण न कराने पर दंड

– यदि कोई निर्माण प्रतिष्ठान अधिनियम लागू होने के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण नहीं कराता, तो उस पर ₹2,000 तक का जुर्माना और हर दिन के उल्लंघन पर ₹100 अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।

8. उपकर जमा न करने पर दंड

– परियोजना लागत पर देय 1%–2% उपकर जमा न करने पर राज्य कल्याण बोर्ड द्वारा वसूली की कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें ब्याज और जुर्माना शामिल होता है।

9. सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रावधानों का उल्लंघन

-यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा, क्रेच, शौचालय आदि की व्यवस्था नहीं की जाती, तो नियोक्ता पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में कारावास का प्रावधान भी है।

10. श्रमिकों के कल्याण में बाधा डालना

– यदि बिल्डर श्रमिकों को कल्याण योजनाओं से वंचित करता है या पंजीकरण में बाधा डालता है, तो प्रशासनिक कार्रवाई, प्रोजेक्ट लाइसेंस रद्द करने तक की सिफारिश की जा सकती है।

11. अनुपालन न करने पर निरीक्षण और मुकदमा

– मुख्य श्रम आयुक्त या राज्य निरीक्षक नियमित निरीक्षण करते हैं। उल्लंघन पाए जाने पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है और अदालत द्वारा दंड निर्धारित किया जाता है।

श्रमिकों और स्थानीय संगठनों को उनके अधिकारों और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी देने की पहल हमारे द्वारा की जा रहीं है श्रमिक उत्थान के लिए कार्य करने वाले हम RTI ड्राफ्ट या शिकायत पत्र भी तैयार कर दे रहे है जिसके आधार पर श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन पर कारवाही की मांग विधिवत किया जाना संभव हो सके ।

अमोल मालुसरे सामाजिक कार्यकर्ता



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