–महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से आत्मनिर्भरता को मिल रहा बढ़ावा
-तेंदूपत्ता संग्रहण से मोहला-मानपुर जिले के 37 हजार 131 संग्राहक परिवारों को मिला 30 करोड़ 65 लाख 79 हजार रुपए से अधिक का भुगतान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल इलाकों में तेंदूपत्ता और बांस को हरा सोना माना जाता है। राज्य सरकारों द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा करने से लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें आत्मनिर्भरता मिली है।
तेंदूपत्ता संग्रहण से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है। तेंदूपत्ता संग्रहण अब गांव में ही रोजगार मिल रहा है। शासन द्वारा समय पर भुगतान और बोनस राशि मिलने से ग्रामीणों का भरोसा और बढ़ा है।
छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के घने वन क्षेत्रों में तेंदूपत्ता ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक वनोपज नहीं, बल्कि ‘हरा सोना’ बनकर आर्थिक संबल का मजबूत आधार बना है। हर वर्ष गर्मी के मौसम में हजारों ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्य से जुड़कर अपने परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
तेंदूपत्ता संग्रहण से प्राप्त राशि का उपयोग ग्रामीण परिवार बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और खेती-किसानी के कार्यों में कर रहे हैं। इस तरह तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।


