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Sunday, March 22, 2026
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ताम्रध्वज साहू के कृपापात्र निगम आयुक्त की जवाबदेही वाले गंभीर विषय ?

पूरब टाइम्स, भिलाई. छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की सरकार को गये हुए लगभग 2 साल हो रहे हैं परंतु अभी तक अनेक निगमों में भाजपा के पार्षदों को हेय दृष्टि से देखा जाता है. इसका एक उदाहरण भिलाई का रिसाली नगर निगम है. इसका मुख्य कारण इस नगर निगम की महापौर कांग्रेस से हैं और पिछली कांग्रेस सरकार के गृहमंत्री का वर्चस्व आज भी रिसाली नगर निगम में है . वर्तमान मं भाजपा विधायक भी निगम के आयुक्त की मनमानी से अछूते नहीं हैं. सूत्रों की मानें तो रिसाली निगम की कार्यशैली में पारदर्शिता के अभाव के कारण, अफसरशाही व भ्रष्टाचार फलने फूलने लगा है. जानकारी के अनुसार सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय में भी निगम आयुक्त व सफाई अधिकारी के विरुद्ध सफाई श्रमिकों के अधिकारों के हनन का मामला चल रहा है . बताया यह जा रहा है कि श्रमिकों की संपूर्ण जानकारी ( हाजरी , भुगतान , सुविधाओं सहित ), सार्वजनिक होते ही , बहुत बड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आयेंगे . कुछ समाज सेवकों ने सूचना के अधिकार के माध्यम से जानकारियां हासिल करने की कोशिश भी की है परंतु कांग्रेसी आकाओं के संरक्षण से उनके लिये नकार दिया जा रहा है. रिसाले निगम की कार्यशैली पर पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

जब से रिसाली निगम बना है तब से निगम संपत्ति, अधिकारी कर्मचारी सेटअप, निगम स्वामित्व के वाहन, साफ सफाई व्यवस्था के लिए आवश्यक उपकरण, पानी टैंकर, ड्रेनेज सफाई के उपकरण, वर्षा जल निकासी के लिए नालियों का ढाल जैसे आधारभूत विषय अनियमितताओं के हवाले है जिसका कारण रिसाली निगम आयुक्त की पदेन जिम्मेदारी के निर्वहन की कमियां को बताया जाना पर दो मत नहीं होंगे क्योंकि इन विषयों का रिकॉर्ड व व्यवस्थापन कार्यवाही की जानकारी रिसाली निगम की वेबसाइट से नदारत है जो कि निगम आयुक्त की प्रशासकीय मंशा को भी प्रश्नांकित करते है ।

पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की राजनीतिक मंशा पर पूर्ण विराम लगने वाली विगत विधानसभा चुनावों की हार ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में कुटिल मंशा के दांव पेंच खूब चले. लेकिन सर्वविहित है कि राजनीतिक दांव पेंच घर बैठे नहीं होते इसके लिए कोई सशक्त माध्यम होना चाहिए, लेकिन क्या वाकई इस मामले में रिसाली निगम आयुक्त की कोई भूमिका है ? यह वर्तमान में शोध और राजनीतिक विश्लेषण का मुद्दा है, जिस पर अपना राजनीतिक अस्तित्व खो देने वाले पूर्व विद्यालय ताम्रध्वज साहू वर्तमान में प्रतिक्रिया देने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे. क्या भाजपा को इस विषय से वाकई कोई लेना देना नहीं है ?

वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण में कांग्रेस की स्थिति दयनीय है क्योंकि विगत विधानसभा चुनावों में उच्च पद प्राप्त कांग्रेसी पिता पुत्र की जोड़ी को रिसाली निगम क्षेत्र की कमियां, हार का स्वाद चखा चुकी है लेकिन इस हार के बाद ताम्रध्वज साहू और पुत्र मोह की बदौलत कांग्रेस का बड़ा पद पाने वाले पुत्र ने पूर्ववत सक्रियता दिखाकर कृपापात्र निगम आयुक्त के विषय में जन अपेक्षित कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है . जिसका कारण जनता जानती है , परिणाम स्वरूप आगामी रिसाली निगम चुनाव के परिणाम भी उल्लेखनीय होंगे. लेकिन निगम आयुक्त स्तर से जो अनियमितता नजर आ रहीं और उसका मूकदर्शन रिसाली के जो पार्षद कर रहें है उनको क्या उनकी पार्टी पुन: पार्षद टिकट देगी ?

रिसाली निगम आयुक्त की अधिनियमित पदेन जिम्मेदारी मामले की जवाबदेही सुनिश्चित करवाने के लिए धारणा प्रदर्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि सभी गड़बडिय़ों के दस्तावेजों व अभिलेखों की उपलब्धता रिसाली निगम के अभिलेखागार में है , जिनके आधार पर निगम आयुक्त को विधिक चुनौती देना है
अमोल मालूसरे सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनैतिक विश्लेषक

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