आज की डिजिटल लाइफस्टाइल, जहां सारा काम कंप्यूटर और स्मार्टफोन के इर्द-गिर्द घूमता है, युवाओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने के कारण गर्दन और कंधों से जुड़ी समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। कई बार यह दर्द इतना असहनीय हो जाता है कि करवट लेना या हाथ हिलाना भी मुश्किल हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ‘फ्रोजन शोल्डर’ के नाम से जाना जाता है, जिसे आयुर्वेद में ‘अवबाहुक शूल’ कहा गया है।
क्या है अवबाहुक शूल?
आयुर्वेद के अनुसार, अवबाहुक शूल का सीधा संबंध शरीर के वात दोष और कफ दोष के असंतुलन से है। जब ये दोष बिगड़ते हैं, तो मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ों में कमजोरी आती है और उनपर वसा (फैट) का जमाव होने लगता है। इसी स्थिति के कारण जोड़ों में तेज दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, कंधे से लेकर गर्दन में खिंचाव और गंभीर स्थिति में गर्दन का न मोड़ पाना जैसे लक्षण सामने आते हैं।
बढ़ते अवबाहुक शूल के मुख्य कारण:
इस समस्या के पीछे हमारी दिनचर्या और खान-पान की कई गलतियाँ जिम्मेदार हैं:
- ज्यादा तला-भूना भोजन करना।
- पानी कम पीना।
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना (डेस्क जॉब)।
- क्षमता से ज्यादा भार उठाना या ज्यादा मेहनत वाला काम करना।
- लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहना।
आयुर्वेद में अवबाहुक शूल का प्रभावी उपचार:
आयुर्वेद में इस दर्दनाक स्थिति से निजात पाने के कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं:
1. तेल मालिश (अभ्यंग): दर्द में तुरंत राहत मालिश रक्त संचार को बढ़ाकर जकड़न कम करने में सबसे असरदार है।
- उपयोग: तिल का तेल, दशमूल तेल या बालाश्वगंधा तेल का इस्तेमाल करें।
- तरीका: रोजाना सुबह और शाम, 10-10 मिनट तक खिंचाव वाले हिस्से पर हल्की मालिश करें।
2. स्वेदन (गर्म सेक): जकड़न दूर करने का उपाय
- गर्म पट्टी (हीटिंग पैड) या गर्म भाप लगे कपड़े का इस्तेमाल करके प्रभावित हिस्से पर सेक करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है।
3. औषधियों और घरेलू चीजों का सेवन:
- हल्दी वाला दूध: हल्दी में मौजूद करक्यूमिन मांसपेशियों की जकड़न कम करता है और दर्द निवारक का काम करता है।
- गिलोय का रस: खाली पेट गिलोय का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हड्डियों को मजबूती मिलती है।
- अश्वगंधा और योगराज गुग्गुल चूर्ण: रात को सोते समय इनका सेवन दर्द और सूजन को कम करने में सहायक है।
- गर्म पानी से स्नान: गुनगुने पानी से नहाना भी मांसपेशियों को राहत देता है।
डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव, जैसे काम के दौरान छोटे ब्रेक लेना, सही पोस्चर में बैठना और संतुलित आहार अपनाना, अवबाहुक शूल जैसी समस्याओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


