पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच तनाव और बढ़ गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित रणनीतिक मायून (पेरिम) द्वीप पर कब्जे की पुष्टि की है। यह द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में स्थित है, जो दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।
हूतियों के इस कदम से क्षेत्र में समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल की संभावना भी जताई जा रही है।
इसी बीच सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को एहतियाती तौर पर बंद कर दिया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने हमले के लिए इराक से आए कई ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। इराक ने हमले की निंदा करते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
मायून द्वीप पर हूतियों का नियंत्रण बाब अल-मंदेब क्षेत्र में उनके सबसे बड़े क्षेत्रीय विस्तारों में से एक माना जा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगियों के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, सऊदी अरब ने जून की शुरुआत तक लाल सागर के बंदरगाह से तेल निर्यात बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक कर दिया था। ऐसे में पाइपलाइन और प्रमुख समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


